सावन शिवरात्रि 2025: आज बन रहा 24 साल बाद दुर्लभ योग, गूंजे ‘बम-बम भोले’ के जयकारे

श्रावण मास की शिवरात्रि आज पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस बार की सावन शिवरात्रि को बेहद खास बना रहा है एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग, जो पूरे 24 वर्षों बाद बन रहा है। इससे पहले यह योग 2001 में बना था।

इस बार शिवरात्रि पर गजकेसरी, मालव्य, नवपंचम और बुधादित्य योग एक साथ बन रहे हैं, जिसे ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने ‘महायोग’ बताया। माना जा रहा है कि इस दुर्लभ संयोग में भोलेनाथ की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

शिव-पार्वती की पूजा से मिलेगा पुण्य

सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार, सावन की शिवरात्रि पर शिव-पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पवित्र भाव और विधिपूर्वक पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

बटेश्वर के 41 प्राचीन मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर के पुजारी जयप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि वाराणसी से आए यज्ञाचार्य सूर्यकांत गोस्वामी के नेतृत्व में कालसर्प दोष और पितृ दोष निवारण के लिए विशेष अनुष्ठान भी आयोजित हो रहे हैं। बटेश्वर में आज यमुना स्नान और भोलेनाथ के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

सावन शिवरात्रि पूजन विधि

  • सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान शिव की जल, दूध, घी, शहद, दही आदि से रुद्राभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, श्रीफल चढ़ाएं।
  • धूप, दीप, फूल, फल अर्पित करें।
  • पूजा में शिव चालीसा, शिवाष्टक, शिव पुराण का पाठ करें।
  • संध्या के समय फलाहार करें।

शिवालयों में सुबह से ही घंटियों की गूंज और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ माहौल भक्तिमय हो गया है। महिलाएं, पुरुष, बच्चे, सभी शिवभक्ति में लीन नजर आए। पंडितों का मानना है कि इस महायोग में पूजा करने से भविष्य के संकट टलते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

 

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