5 किमी Soldierathon मैराथन में छाए अक्षित रावत, नहीं हैं दोनों हाथ…फिर भी कर दिखाया

दिल्ली : दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (AHRR) में फिटिस्तान द्वारा आयोजित “Venkey’s AHRR Soldierathon” में 23 वर्षीय अक्षित रावत ने एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की। दोनों हाथ न होने के बावजूद अक्षित ने 5 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण मैराथन को पूर्ण दृढ़ता के साथ पूरा किया, जिससे उन्होंने न केवल अपनी हिम्मत का परिचय दिया, बल्कि सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए।

दुर्घटना के बाद भी नहीं मानी हार

अक्षित रावत ने एक हाई टेंशन 11,000 वोल्ट की इलेक्ट्रिक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिए थे। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अक्षित ने कहा, “दौड़ना मेरे लिए सिर्फ एक रेस नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से जूझने का तरीका है।” उनकी यह भावना और कठिन प्रशिक्षण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

आयोजकों ने की प्रशंसा

फिटिस्तान के प्रतिनिधि ने अक्षित के जज्बे की सराहना करते हुए कहा, “अक्षित ने दिखा दिया कि शारीरिक कमी किसी के आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति को कम नहीं कर सकती। उनकी यह उपलब्धि नौजवानों के लिए एक मिसाल बनेगी।” इस Soldierathon में सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें ज्यादातर शारीरिक रूप से स्वस्थ थे, लेकिन अक्षित की मेहनत और साहस ने सभी का ध्यान खींचा।

विशेष सम्मान से नवाजे गए अक्षित

मैराथन के समापन समारोह में अक्षित रावत को उनके असाधारण साहस के लिए विशेष पुरस्कार और प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल खेल की भावना को उजागर किया, बल्कि मानवीय आत्मबल और सकारात्मक सोच की ताकत को भी सामने लाया।

एक प्रेरणादायक संदेश

अक्षित रावत की कहानी सिर्फ एक मैराथन की जीत नहीं, बल्कि जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाने की कहानी है। उन्होंने यह संदेश दिया कि मजबूत इरादों के साथ कोई भी चुनौती असंभव नहीं। उनकी यह यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में मुश्किलों का सामना कर रहा है।

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