धर्मांतरण कानून विधेयक के बाद राज्यपाल ने लौटाया उत्तराखंड यूसीसी संशोधन विधेयक।
देहरादून-18 दिसम्बर 2025
उत्तराखंड लोकभवन ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2025 को वापस सरकार को लौटाने के बाद अब समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी लौटा दिया है। ऐसे में अब राज्य सरकार को समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2025 में फिर से संशोधन के साथ विधानसभा में पारित करना होगा।
दरअसल, यूसीसी उत्तराखंड संशोधन विधेयक की धारा 4 के खंड 3 पर लोक भवन ने आपत्ति जताई है। क्योंकि इसके प्रावधान मूल अधिनियम में भी शामिल हैं. ऐसे में इस संशोधन विधेयक के संबंध में राज्यपाल की ओर से दिए गए संदेश के साथ इस विधेयक को दोबारा से सदन में पारित करना होगा।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान 20 अगस्त को समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया गया था. इसके बाद राज्यपाल की संस्तुति के लिए इस संशोधन विधेयक को लोकभवन भेजा गया था। लेकिन कुछ कमियों के चलते लोकभवन ने इसे सरकार को वापस लौटा दिया है। यूसीसी उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2025 की धारा 4 में निर्धारित आयु से कम उम्र में विवाह पर सजा के प्रावधान का दो बार उल्लेख किया गया है, जिस पर लोकभवन ने आपत्ति जताई है।दरअसल, इस संशोधन विधेयक की धारा 4 के खंड 3 में पुरानी सजा के रहते हुए नई सजा का भी उल्लेख है। ऐसे में भविष्य में गलतफहमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जिसके चलते लोकभवन ने इस विधायक को गृह विभाग को भी भेजा है। ताकि एक बार फिर से यूसीसी उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2025 में संशोधन करते हुए विधानसभा से पारित कर लोकभवन भेजा जाए। इस आपत्ति के साथ ही लोकभवन ने राज्यपाल के संदेश के साथ सरकार को संशोधन विधेयक लौटा दिया है। लोकभवन की ओर से हाल ही में वापस लौटाए गए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2025 को लागू करने के लिए धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग काम में जुट गया है। जिसकी मुख्य वजह यही है कि ये विधेयक सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधेयकों में से एक है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इस संशोधन विधेयक को नए विधेयक के रूप में विधानसभा में पारित होने से पहले राज्य सरकार इस अध्यादेश के जरिए लागू कर सकती है। ताकि इसके सख्त प्रावधानों को लागू रखा जा सके। साथ ही भविष्य में होने वाले विधानसभा सत्र में सरकार इसे विधेयक के रूप में आसानी से पारित कर सकेगी।उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2025 इसलिए खास है, क्योंकि सरकार ने जबरन धर्मांतरण के लिए सजा के सख्त प्रावधान यानी आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया है।
