उत्तराखंड में जल्द नए स्वरूप में नज़र आएगी आयुष्मान और गोल्डन कार्ड योजना।

उत्तराखंड में जल्द नए स्वरूप में नज़र आएगी आयुष्मान और गोल्डन कार्ड योजना।

उत्तराखंड-06 फरवरी 2026

स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए इस साल तमाम बड़े बदलाव करने का लक्ष्य रखा हैं। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना में किया जाना है। दरअसल, पिछले साल राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि अटल आयुष्मान योजना को इंश्योरेंस मोड और गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर संचालित किया जाएगा। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद न सिर्फ आम जनता को इलाज मिलने में काफी सहूलियत होगी बल्कि राज्य सरकार की काफी टेंशन भी इससे दूर हो जाएगी। आखिर क्या है ये योजना, मरीज या उनके तामीरदारों को कागजी कार्रवाई से किस तरह से मिलेगी राहत? देखिए रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य में हर साल आयुष्मान योजना सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च होता है। दरअसल, उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुई। जिसके बाद से अभी तक 17 लाख से अधिक मरीजों का निशुल्क इलाज किया गया है जिसपर राज्य सरकार ने 3400 करोड़ रुपए खर्च किए है। जबकि प्रदेश में करीब 61 लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसी तरह, उत्तराखंड राज्य में संचालित गोल्डन कार्ड योजना के तहत पिछले 5 सालों में करीब 750 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं जबकि इस योजना के तहत कर्मचारियों की ओर से मिलने वाला अंशदान करीब 60 से 65 फीसदी रहा है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना में बदलाव करने का निर्णय लिया है।

दरअसल, पिछले साल 24 दिसंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान कैबिनेट में स्वास्थ्य विभाग के इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी थी। इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग इस प्रक्रिया को लागू करने की कवायत में जुटा हुआ है। मुख्य रूप से इस प्रक्रिया के लागू होने के बाद जहां एक ओर राज्य सरकार पर निशुल्क इलाज के लिए बढ़ रहा खर्च का वहन काम होगा। तो वहीं, दूसरी ओर आसानी और सुलभ तरीके से मरीज को स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा। हालांकि, ये जरूर है कि गोल्डन कार्ड योजना के तहत कर्मचारियों से लिए जाने वाले अंशदान में बढ़ोत्तरी होगी।

वही, ज्यादा जानकारी देते हुए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की मिशन निदेशक रीना जोशी ने कहा कि आयुष्मान योजना के संचालन में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इससे आयुष्मान कार्ड धारकों को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि जिस तरह से उनका स्वास्थ्य सुविधा का निशुल्क लाभ मिल रहा है इस तरह से उनका लाभ मिलता रहेगा। हां इतना जरूर है कि अभी तक इलाज का क्लेम, अस्पतालों की ओर से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से लिया जा रहा था। अब वो इंश्योरेंस कंपनी के जरिए क्लेम दिया जाएगा। इस निर्णय के बाद आयुष्मान योजना की एफिशिएंसी और अधिक बढ़ेगी। साथ ही बताया कि आयुष्मान कार्ड योजना को इंश्योरेंस मोड पर संचालित करने के तहत लाभार्थियों को कोई अलग नंबर नहीं दिया जाएगा बल्कि आयुष्मान कार्ड के जरिए ही निशुल्क इलाज का लाभ मिलेगा।

वही, स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने कहा कि गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर चलने का निर्णय लिया गया है। अभी तक गोल्डन कार्ड योजना के तहत कैशलेस इलाज की व्यवस्था थी लेकिन इसमें 5 लाख रुपए तक ही प्रतिपूर्ति का प्रावधान था। ऐसे में इस योजना के तहत गोल्डन कार्ड धारकों को 5 लाख रुपए तक के इलाज को कैशलेस सुविधा के रूप में संचालित किया जाएगा ऐसे में अगर इलाज का खर्च 5 लाख से अधिक होता है तो उसे इंश्योरेंस मोड पर संचालित किया जाएगा। इसे सबसे अधिक फायदा ये होगा कि बेहतर ढंग से स्वास्थ्य सेवाओं को लागू किया जा सकेगा।

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