गैरसैंण के स्यूणी मल्ली के जंगल आग की चपेट में,बहुमूल्य वन संपदा हो रही खाक।
जागरूकता कार्यक्रमों पर करोडों खर्चने के बावजूद हालात जस के तस
मेहलचौरी (गैरसैंण)-27 फरवरी 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.
फायर सीजन के शुरू होते ही वन विभाग के कर्मचारयों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार सहित अन्य जंगली जानवरों की लगातार बनी सक्रियता पहले ही सर दर्द बनी हुई है , वहीं इस बीच जंगलों में लगने वाली आग के चलते कर्मचारियों को दोहरे मोर्चे पर जिम्मेदारीयां निभानी पड़ रही हैं ।विकासखंड घर्षण के अंतर्गत लोहवा रेंज के स्यूणी मल्ली गांव के समीप जंगल में आग लगने की सूचना के बाद वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप गौड़ के निर्देश पर टीम मौके के लिए रवाना हो गई है।
बसंत ॠतु का मौसम शुरू होते ही जहां जंगलों में नई घास के साथ ही छोटे पौधे ओर झाड़ियां भी उगने शुरू हो जाती हैं, इसके साथ ही पक्षियां ओर अन्य जानवर भी घोसला बनाकर जीवन के प्रति नहीं आश जगाते हैं,लेकिन ठीक ऐसे मौके पर जंगलों में लगने वाली आग से जहां महत्वपूर्ण वनस्पतियों ओर जड़ी-बुटियों का नुकसान होता है ,वहीं पक्षियों के घोंसले भी जल जाते हैं। लेकिन वन विभाग की लाख कोशिशों ,प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रमों पर करोडों रूपये की धनराशी खर्चने के बावजूद वनों में आग लगने की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं ,जिससे एक तरफ विभाग को लाखों रूपये की धनराशी खर्च होने के साथ ही वन संपदा के नुकसान की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। जिसको लेकर वन क्षेत्राधिकार प्रदीप गौड कहते हैं कि जन जागरूकता से ही बहुमूल्य वन संपदा को बचाकर पर्यावरणीय पारिस्थितिकी को मजबूत किया जा सकता है ,जो मानव जीवन के लिए अस्तित्व के लिए बेहद आवश्यक है । वनों में बढती आग की घटनाओं को लेकर पूर्व प्रमुख जानकी रावत ,नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष पुष्कर सिंह रावत,पूर्व जिला पंचायत सदस्य अवतार सिंह पुंडीर कहते हैं ,कि वनों से संबंधित कार्य योजनाओं के साथ ग्रामीणों को सीधा जोड़ने के साथ ही वनों को आम ग्रामीण की आय का साधन बनाकर ही जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है ।
