चारधाम ओर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों को पैदल यात्रा पर निकले युवक,उत्तर प्रदेश के अटेसुवा गांव के रहने वाले हैं विपिन ओर ओमवीर, देश धर्म ओर संस्कृति को जानने के लिए निकले पैदल,दो साल में पूरी होगी 18 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा

चारधाम ओर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों को पैदल यात्रा पर निकले युवक,उत्तर प्रदेश के अटेसुवा गांव के रहने वाले हैं विपिन ओर ओमवीर।

देश धर्म ओर संस्कृति को जानने के लिए निकले पैदल,दो साल में पूरी होगी 18 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा

मेहलचौरी (गैरसैंण)-20 मार्च 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.

एक तरफ धर्म की आस्था और दूसरी तरफ देश को जानने का जज्बा जब दिल में हो ,तो फिर इस रास्ते पर चलने वाला पैर के छालों को नहीं देखता। ऐसा ही बीड़ा उठाए लखनऊ के दो युवक तिरंगा थामे पैदल ही भारत-भ्रमण पर निकले पडे। देश के अलग-अलग दिशाओं में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों ओर चार धामों के दर्शन करने के साथ ही देश की संस्कृति को जानने का जज्बा लिए उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के नजदीकी अटेसुआ गांव के 23 वर्षीय विपिन सिंह पुत्र चंद्रपाल सिंह अपने साथी ओमवीर सिंह पुत्र अशोक सिंह के साथ इसी माह 1मार्च से पैदल भ्रमण पर निकले हैं.उत्तराखंड से यात्रा शुरू करने वाले युवाओं ने पहले कैंची-धाम नैनीताल में दर्शन किए, यहां से नीम-करौली बाबा का आशीर्वाद साथ लेकर आगे की यात्रा पर निकल गये।

कुमाऊं क्षेत्र से होते हुए गढ़वाल मंडल के पहले बाजार मेहलचोरी पहुंचने पर “उत्तराखंड-अपडेट” से बातचीत में विपिन ने बताया कि देश को समझने की ललक और शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित चार धामों और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा ने उनके अंदर यह प्रेरणा ओर जज्बा जगाया है । शंकराचार्य जी की जीवनी ओर संघर्षों को पढने का मौका मिला ,अल्प जीवन काल में ही उनके द्वारा भारत जैसे विशाल ओर विविधता वाले देश को जोडने का अद्धभुत काम किया जिससे प्रेरणा लेकर वे साथी ओमवीर के साथ पैदल ही घर से निकल पड़े ।हाथ में तिरंगा लिए और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का एक बैनर पीठ पर लगाए युवाओं ने बताया की 1 मार्च से यात्रा प्रारंभ की थी ,प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर पैदल चलते हैं ।चार धाम ओर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने में लगभग 18 हजार किलोमीटर का पैदल सफर तय करेंगे , जिसमें डेढ़ से 2 साल लगने की संभावना है।वह बताते हैं की यात्राओं के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न भाषाओं ओर संस्कृति के लोगों से मिलना होता है ।जिससे एक तरफ देश को जानने समझने का मौका मिलता है , वहीं यात्रा के लिए ऊर्जा भी मिलती है। इंटर तक की पढ़ाई कर चुके युवा देश ,धर्म ओर संस्कृति को जानने -समझने के साथ ही आगे की पढ़ाई भी जारी रखेंगे।

चार धाम बदरीनाथ उत्तराखंड ,जगन्नाथ पुरी उड़ीसा, द्वारका गुजरात,रामेश्वरम तमिलनाडु में स्थित है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ उत्तराखंड,काशी विश्वनाथ उत्तर प्रदेश,ओंकारेश्वर एवं महाकालेश्वर मध्य प्रदेश, सोमनाथ एवं नागेश्वर गुजरात, भीमाशंकर,त्रयंबकेश्वर एवं घृष्णेश्वर महाराष्ट्र, मल्लिकार्जुन आंध्र प्रदेश, रामेश्वरम तमिलनाडु, बैद्यनाथ झारखंड में स्थित हैं।

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