टिहरी झील के किनारे 79 नाली चारागाह भूमि की नीलामी का विरोध,क्या भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की तैयारी…?
नई टिहरी:- 17 जून 2026
टिहरी झील के आसपास स्थित रामगांव और बौर गांव की चारागाह भूमि की नीलामी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। डोबरा-चांठी रिंग रोड क्षेत्र में स्थित इन गांवों की करीब 79 नाली (1.577 हेक्टेयर) गोचर भूमि के सशुल्क आवंटन के लिए जिला प्रशासन ने निविदा जारी की है, जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी है। प्रशासन ने 11 जून 2026 को जारी निविदा में भूमि के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है,जबकि निविदा प्रपत्र 15 जून से डाउनलोड किए जा सकेंगे और 26 जून को जिला कार्यालय में प्री-बिड बैठक आयोजित होगी।
ग्रामीणों का आरोप: भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की तैयारी⤵️
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भूमि वर्षों से पशुपालकों द्वारा चरान-चुगान के लिए उपयोग में लाई जाती रही है और स्थानीय जनजीवन का अहम हिस्सा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन चुपचाप इस भूमि को नीलामी के जरिए बाहरी लोगों और भू-माफियाओं को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
मूल निवास और भू-कानून आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब टिहरी बांध विस्थापित आज भी पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब चारागाह भूमि को नीलामी के लिए उपलब्ध कराना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि इस भूमि का उपयोग स्कूल, अस्पताल या पुनर्वास जैसी सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए किया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल⤵️
ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को भी आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, बीडीसी सदस्य और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधि इस संवेदनशील विषय पर मौन साधे हुए हैं। लोगों का सवाल है कि जब गांव की साझा भूमि दांव पर लगी है, तब जनप्रतिनिधि आखिर क्यों खामोश हैं?
हालांकि, प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी ने नीलामी का विरोध करते हुए कहा कि यदि भूमि का उपयोग जनहित और उद्योगों के लिए हो तो उसका स्वागत है, लेकिन किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं को लाभ नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
ग्रामीणों की आंदोलन की चेतावनी⤵️
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निविदा तत्काल रद्द करने और पूरे मामले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो रामगांव और बौर गांव के लोग आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे,जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
अब सबकी नजर 26 जून को होने वाली प्री-बिड बैठक पर टिकी है। देखना होगा कि प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहता है या फिर ग्रामीणों के बढ़ते विरोध के आगे झुकता है।
