देहरादून के सात मोड़ में 4369 पेड़ों की कटाई पर रोक,विरोध के बाद सरकार ने लिया फैसला।
देहरादून:-18 जुलाई 2026
देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना के तहत सात मोड़ क्षेत्र में प्रस्तावित 4369 पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। हालांकि अब तक 350 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्थानीय लोगों, पर्यावरणविदों और अन्य हितधारकों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी पक्षों के बीच संतोषजनक सहमति और विश्वास का माहौल नहीं बनता, तब तक पेड़ों की कटाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
विरोध के बाद सरकार का फैसला।
सात मोड़ में पेड़ों की कटाई के विरोध में पिछले 13 दिनों से स्थानीय नागरिक, पर्यावरणविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार आंदोलन कर रहे थे। कई बार प्रदर्शनकारी पेड़ों से चिपककर कटाई रोकने की कोशिश करते नजर आए, जबकि वन विभाग और आंदोलनकारियों के बीच कई बार नोकझोंक भी हुई। हरेला के अवसर पर आंदोलनकारियों ने ‘ब्लैक हरेला’ मनाकर हाथों में काले पोस्टर और बैनर लेकर विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन को मिला उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) सहित कई सामाजिक संगठनों का समर्थन।
आंदोलन को उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) सहित कई सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिला। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी देहरादून दौरे के दौरान सात मोड़ पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने उनकी बातें सुनीं और भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल से चर्चा करेंगे तथा जरूरत पड़ने पर इसे संसद और अन्य उचित मंचों पर भी उठाएंगे।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ दोबारा विस्तृत संवाद करें। सभी की राय लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा जरूरी है, लेकिन यह विकास पर्यावरण, जनभावनाओं और स्थानीय हितों की कीमत पर नहीं होगा।
परियोजना के तहत वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास बनाया जाएगा। साथ ही छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट भी बनाए जाएंगे, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि,इस परियोजना से जुड़ी आगे की सभी कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों और तय कानूनी व पर्यावरणीय प्रावधानों के अनुरूप ही की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता प्रकृति का संरक्षण, जनता की भावनाओं का सम्मान और राज्य का संतुलित विकास है।
