कुलपति ने किया हरगड़ भरसार ईकाई का निरीक्षण,5.45 करोड से बने नये भवन में जल्द स्थानान्तरित होगा कार्यालय।
जनप्रतिनिधियों की कृषी स्नातक कक्षाएं शुरू करने की मांग,वर्तमान में दो दर्जन फल व औषधीय पादप परिक्षेत्र विकसित।
मेहलचौरी (गैरसैंण)- 10 अगस्त 2026
रिपोर्ट:-प्रेम संगेला
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के हरगढ-मेहलचौरी स्थित पर्वतीय कृषि महाविद्यालय का भरसार पौडी के कुलपति द्वारा नवनिर्मित भवन के साथ ही नवाचार ओर अनुसंधान आधारित परिक्षेत्र का गहन निरीक्षण किया गया। कुलपति के निरीक्षण से अब नये प्रशासनिक भवन के संचालन की उम्मीद बढ गयी है, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग के अनुरूप भविष्य में स्नातक स्तरीय कृषि कक्षाओं के खुलने की भी संभावना बढ गयी है। जिससे क्षेत्र के विधार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा का लाभ मिलने के साथ ही अनुसंधान ओर नवाचार की संभावनाएं भी बढेंगी।
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औधानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के कुलपति भगवती प्रसाद भट्ट द्वारा 5.45 करोड रुपये से बने प्रशासनिक भवन सहित, 500 नाली भूमि पर स्थापित परिसर के अंतर्गत नवाचार कार्यक्रम के तहत दर्जनभर से ज्यादा औषधीय पौधों ओर इतने ही फलों की बागवानी की इकाइयों का भी निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान कुलपति ने कहा की भवन तय समय पर बनकर तैयार हो गया है, जिसका संचालन जल्द शुरू कर दिया जाएगा। जिससे प्रशासनिक व फील्ड स्तर के कार्य बेहतर तालमेल के साथ आगे बढ सकेंगे। कृषी कक्षाओं के संचालन को लेकर उन्होंने कहा की भवन बनने से ढांचागत सुविधाएं प्रयाप्त हो गयी हैं। शासन के निर्देशों के क्रम में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा की स्थानीय जलवायु के अनुकूल संचालित दो दर्जन इकाइयों को भविष्य में वैज्ञानिक विधि के साथ स्थानीय काश्ताकारों के रोजगार बढ़ाने का माध्यम भी बनाया जाएगा।
संस्थान की प्रभारी मधुलिका पांडे ने कहा कि वर्तमान में स्वीकृत 18 पदों में से केवल दो ही स्थाई पदों पर नियुक्ति हुई है,जबकि चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स से नियुक्तियां हुई हैं। बीएससी कक्षाएं प्रारंभ होने की स्थिति में रिक्त 16 पदों पर प्रवक्ता व कृषि वैज्ञानिकों की नियुक्ति होने से क्षेत्र को कृषी उधान के क्षेत्र में वैज्ञानिक विधियों का इस्तेमाल कर निजी इकाईयां स्थापित कर बेहतर रोजगार का लाभ मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि 2013 में स्थापित भरसार इकाई का मेहलचौरी में किराए के भवन पर संचालन शुरू किया गया था। तब शुरुआती वर्षों में यहां नर्सरी माली की ट्रेनिंग भी दी जाती थी,जिसे बाद में बंद कर दिया गया था। उसी दौरान संस्थान के अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की सूचना के बाद स्थानीय स्तर पर हुए विरोध के बाद यहां सगंध पादप संस्थान के रूप में चल रहे संस्थान को पर्वतीय कृषी महाविधालय के रूप में मान्यता दी गयी।
2023 में विधायक अनिल नौटियाल के प्रयासों से कृषि मंत्री गणेश जोशी यहां निरीक्षण को पंहुचे तो बेहतर ढलानी भौगोलिक संरचना को देख नया भवन बनाने के लिए 5.45 करोड रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई थी।
जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने कहा की भरसार की स्थापना के लिए धारापानी के ग्रामीणों ने 500 नाली भूमि दान दी है,जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए ।
विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल ने कहा की नये भवन के जल्द संचालन के साथ ही स्नातक स्तरीय कृषी कक्षाएं संचालित करने के प्रयासों के साथ ही संस्थान को राज्य स्तरीय कृषी संस्थान के रूप में विकसित किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कुलपति के साथ संस्थान प्रभारी मधुलिका पांडे,अधिष्ठाता प्रोफेसर अजय कुमार जोशी,तेजस भोंसले,उप वित्त नियंत्रक धीरज उपाध्याय शामिल रहे।
नये बने प्रशासनिक भवन में कुल 22 कक्षों में से 11 कार्यालय कक्ष, 1 विशाल सामुदायिक कक्ष,6 कक्षा कक्ष,4 प्रोगशालाएं शामिल हैं.वर्तमान में यहां फलों में शामिल
सेब,कीवी,अखरोट,आडु,खुमानी,अमरूद,नाशपाती,बादाम,कीनू,संतरा,कागजी नींबू आदी व औषधीय पौधों में डैमस्क गुलाब,रोजमेरी,लेमनग्रास,सिट्रोनेला,इस्बगोल,स्टीविया,ब्रह्मी,तेजपत्ता,तुलसी,पुदीना,एलोविरा आदि की इकाइयां जलवायु के अनुकुल तकनीक के साथ विकसित कर संचालित की जा रही हैं।
