प्राकृतिक आपदा से असुरक्षित और अशांत हो चली सीमांत नीती घाटी।
चमोली:- 11 अगस्त 2026
रिपोर्ट:- रजपाल बिष्ट
उच्च हिमालय में स्थित तिब्बत सीमा से सटी सीमांत नीती घाटी प्राकृतिक आपदा के चलते असुरक्षित और अशांत हो चली है। इसके चलते सीमांतवासियों का जनजीवन खतरे की जद में आ गया है।
दरसअल मौसम के बिगडे़ मिजाज के चलते एक दौर में प्राकृतिक आपदा से सबसे सुरक्षित माने जाने वाली चमोली जिले की सीमांत नीती घाटी पर अब लगातार खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते आम लोगों का जीवन इस तरह खतरे में पड़ गया है कि लोग इस घाटी में प्रवास करने से भी कतराने लगे हैं।
बताते चलें कि वर्ष 2021 की 7 फरवरी को सीमांत नीती घाटी में प्रकृति का कहर इस तरह टूट पड़ा कि करीब 200 जिंदगियां आपदा की भेंट चढ़ गई। रैणी-तपोवन की आपदा के चलते कई गांव तबाह हुए। इस भीषण आपदा में सैकड़ों जिंदगियां तो गई अपितु निजी तथा सरकारी परिसंपत्तियां भी मलबे में तब्दील हो गई। धौलीगंगा पर बने तमाम पैदल और सड़क पुल आपदा की भेंट चढ़ गए। इससे सीमांतवासियों की आवाजाही कई दिनों तक धमी रही। रैणी तथा तपोवन में तो बर्वादी ने लोगों को बेहाल करे रखा। इसके बाद भी आपदा का कहर थमा नहीं और लोग लगातार आपदाओं के कारण बेहाल जिंदगी जीने को मजबूर हुए। हिम चोटियां बर्फ विहीन होती रही। यहां तक की हिमस्खलन की घटनाओं ने लोगों को बेहाल किए रखा। हालाता इस कदर खराब हो चले है कि मौसमीय चक्र में आ रहे बदलाओं के चलते लोग अब इस घाटी में गुजर बसर करने से कतरा रहे हैं।
सोमवार को नीती घाटी के तमक नाले में आए सैलाब के चलते एक व्यक्ति का अभी तक पता नहीं चल पाया है तो बैलीब्रिज भी आपदा की भेंट चढ़ गया। इससे सीमांतवासियों की आवाजाही प्रभावित होकर रह गई है। पर्यावरणविद यकायक आपदा की इस घटना को मौसम चक्र में आ रहे बदलाव को कारण बता रहे है। प्रकृति है कि अपना मिजाज बदलने को तैयार ही नहीं है। मानसून सत्र के इस दौर में तमक गदेरे आए जलजले से लोगों की चिंता बढ़ गई है। भौतिक सुख के लालच में प्रकृति से छेड़छाड के कारण ही प्राकृतिक आपदाएं विनाश का कारण बन रही है। यह स्थिति पहाड़ों के अस्तित्व के लिए चिंता के रूप में सामने आ रही है। वैसे भी 2023 के जनवरी के शुरूआती दिनों में जोशीमठ की भू-धंसाव की आपदा ने एक ऐतिहासिक शहर को बर्बादी की ओर धकेल दिया था। इस आपदा के चलते लोग अभी तक संभले नहीं संभल पा रहे हैं। इस आपदा में 868 मकानों में दरारें आई जबकि 181 मकान अनसेफ जोन में आए। प्रभावितों को मकानों को छोड़कर राहत शिविरों में कई महीनों गुजारने पड़े। अब भी हालात चिंताजनक बने हुए है। अब तो जोशीमठ के प्रभावितों के सामने बसागत का सवाल खड़ा हो गया है। अभी भी तमाम लोग विस्थापन का दंश झेल रहे हैं।
सोमवार को नीती घाटी में भारी बारिश के कारण तमक नाले से बैलीब्रिज के बहने और एक व्यक्ति के लापता होने के बाद प्रशासन ने भी आवाजाही को सुचारू करने को मोर्चा संभाल लिया है। तमक नाले ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई तौर पर सड़क मार्ग तैयार करने की जोरदार कयावद चल रही है।प्रशासन का दावा है कि जल्द ही आवाजाही सुचारू कर दी जाएगी। अधिकारियों की टीम मौके पर रह कर मार्ग बहाली के काम में जुट कर सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ रही है। मौसम एवं नाले के जलस्तर की स्थिति को ध्यान में रखकर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने स्थानीय लोगों एंव वाहन चालकों से अपील की है मार्ग बहाली का कार्य पूरा होने तक प्रभावित क्षेत्र में अनावश्यक आवागमन से बचा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 की केदारनाथ यात्रा के बाद पहाड़ों में प्रकृत्ति का तांडव लगातार जारी है। इस आपदा में बदरीनाथ घाटी में भी भारी तबाही मची थी और चमोली की भी पिंडर घाटी में भी आपदा ने जबरदस्त कहर बरपाया था। नंदाकिनी भी समय-समय पर अपना रौद्र रूप दिखा रही है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर तथा पिथोरागढ जनपद आपदा की दृष्टि से जोन 5 में स्थित है। इसके चलते भूकंप जैसी घटनाएं आम हो चली है। भू-स्खलन ने भी इन संवेदनशील जनपदों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। यह स्थिति उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए चिंता का सबब बनती जा रही है। सीमांत नीती घाटी की इस आपदा को इसी रूप में देखा जा रहा है। अब तो सीमांत नीती घाटी भी आपदा की दृष्टि से असुरक्षित और अशांत होकर रह गई है।
