एक नंबर की दो कारें,चेसिस नंबर भी सेम,आधार नंबर भी एक,जांच में जुटा परिवहन विभाग।
ऊधमसिंह नगर:-12 अगस्त 2026
रुद्रपुर के एआरटीओ कार्यालय में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर की दो स्विफ्ट डिजायर कारें जब एआरटीओ कार्यालय में आमने-सामने पहुंचीं तो जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दोनों कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर ही नहीं, बल्कि चेसिस नंबर भी हूबहू एक जैसा मिला। यही नहीं, दस्तावेजों की पड़ताल में आधार नंबर भी समान मिला,जबकि फोटो और जन्मतिथि अलग-अलग हैं। अब सवाल है कि आखिर असली कार कौनसी है और दूसरी कार सड़क पर कैसे दौड़ती रही? अब मारुति एजेंसी की तकनीकी जांच रिपोर्ट इस पूरे खेल से पर्दा उठाएगी।
एक नंबर, दो कारें और दोनों का चेसिस नंबर भी एक। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि रुद्रपुर के संभागीय परिवहन कार्यालय में सामने आया चौंकाने वाला मामला है। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर वाली दो स्विफ्ट डिजायर कारें अलग-अलग लोगों के नाम सामने आने के बाद एआरटीओ कार्यालय में हड़कंप मच गया। मामला खुलने के बाद परिवहन अधिकारियों ने दोनों वाहन मालिकों को आमने-सामने बुलाकर कारों की जांच की। शुरुआती तकनीकी जांच में भी तस्वीर साफ नहीं हो सकी। अब असली वाहन की पहचान और पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए स्थानीय मारुति एजेंसी की तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है।
जानकारी के अनुसार ज्वालापुर, हरिद्वार निवासी सहदेव कुमार पाल पुत्र गोपाल सिंह मंगलवार को अधिवक्ता हेमंत प्रकाश के साथ एआरटीओ कार्यालय पहुंचे. उन्होंने शिकायत की कि (UK-06 एएन-0807) नंबर की स्विफ्ट डिजायर कार उनके नाम पर पंजीकृत है. वह वाहन का बीमा नवीनीकरण कराने पहुंचे तो उन्हें पता चला कि इसी रजिस्ट्रेशन नंबर की दूसरी कार का बीमा किसी अन्य व्यक्ति के नाम चल रहा है।
दोनों कारों के मालिक पहुंचे एआरटीओ दफ्तर: शिकायत के बाद परिवहन विभाग ने रिकॉर्ड खंगाला तो इसी नंबर की दूसरी कार नीरज कुमार पुत्र राजेंद्र, निवासी ग्राम धमोला, कालाढूंगी, नैनीताल के नाम दर्ज मिली. मामला गंभीर होने पर उप सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी मोहित कोठारी ने नीरज कुमार को भी उनकी कार समेत एआरटीओ कार्यालय बुलाया।
एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर, एक ही चेसिस नंबर वाली कारें सड़क पर कैसे: इसके बाद दोनों कारें जब एक-दूसरे के सामने खड़ी की गईं तो अधिकारियों के सामने ऐसा मामला आया,जिसने पूरे विभाग को हैरान कर दिया. दोनों कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक था।तकनीकी जांच के दौरान चेसिस नंबर भी हूबहू समान पाया गया. अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया कि एक ही रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर वाली दो कारें आखिर सड़क पर कैसे पहुंच गईं?
जांच के दौरान नीरज कुमार ने बताया कि हमने कार केलाखेड़ा के एक डीलर के माध्यम से खरीदी थी। डीलर ने जिस व्यक्ति से कार खरीदने की बात बताई, उसके दस्तावेजों में सहदेव कुमार पाल का आधार कार्ड भी सामने आया. यहां मामला और पेचीदा हो गया। आधार नंबर सहदेव कुमार के नाम का ही था, लेकिन आधार कार्ड पर लगी फोटो और जन्मतिथि अलग-अलग मिलीं. इससे दस्तावेजों के फर्जी इस्तेमाल की आशंका भी सामने आई।
विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि वाहन पूर्व में रुद्रपुर निवासी एक चिकित्सक के नाम दर्ज था। इसके बाद वाहन अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई। अब वाहन के पुराने रिकॉर्ड,ट्रांसफर दस्तावेज और संबंधित डीलर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अब परिवहन विभाग पुराने रिकॉर्ड, वाहन के ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेज और पूरे प्रकरण में डीलर की भूमिका की जांच कर रहा है।स्थानीय मारुति एजेंसी से भी तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है।तकनीकी जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि दोनों में वास्तविक वाहन कौन सा है और दूसरे वाहन के चेसिस या दस्तावेजों में कहां और किस स्तर पर कथित छेड़छाड़ हुई।
एआरटीओ प्रशासन मोहित कोठारी ने बताया कि-दोनों वाहनों की जांच कराई जा रही है। एक वाहन की पहचान सही पाए जाने की दिशा में जानकारी मिली है, जबकि दूसरे वाहन के चेसिस नंबर की विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक है। मारुति कंपनी की रिपोर्ट और पुराने दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
