गोपेश्वर के घिंघराण मोटर मार्ग पर भू-धंसाव से ब्रह्मसैण कस्बे पर पड़ी आपदा की मार।
गोपेश्वर (चमोली)- 16 अगस्त 2026
रिपोर्ट- रजपाल बिष्ट
चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर के घिंघराण मोटर मार्ग पर ब्रह्मसैण खतरे की जद में आ गया है। इसके चलते आवासीय तथा व्यवसायिक मकानों पर खतरा तो मंडराने ही लगा है अपितु सड़क धंसाव के चलते वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो गई है। दरअसल घिंघराण सड़क मार्ग पर स्थित ब्रह्मसैण कस्बे पर पिछले साल से ही आपदा की मार पड़ गई थी। सड़क के निचले हिस्से में धंसाव होने के चलते अब आवासीय तथा व्यावसायिक मकाने भी खतरे की जद में आ गई है। हालांकि पिछले साल से ही इस क्षेत्र के ट्रीटमेंट के लिए कार्ययोजना तैयार की गई किंतु अभी तक भी ट्रीटमेंट की योजना के धरातल पर न उतरने के कारण मौजूदा दौर में लगातार हो रही अतिवृष्टि के चलते रिहायसी इलाके से सटी सड़क इस तरह धंस गई है कि अब मकान भी खतरे की आशंका से घिर गए हैं।
फिलहाल सड़क से करीब 50 मीटर नीचे भू-धंसाव ने जोर पकड़ लिया है। इसके चलते सड़क भी लगातार धंसती जा रही है। हालात इस कदर चिंता जनक हो गए हैं कि चैपहिया वाहनों की आवाजाही तो ठप पड़ गई है अपितु अब दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी थम गई है। इसके चलते एक बड़े इलाके के लोगों के लिए आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है। इससे जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी संकट गहराने लगा है। हालांकि लोनिवि ने सड़क मार्ग को व्यवस्थित करने की कवायद शुरू तो कर दी है किंतु भू-धंसाव का सिलसिला जारी रहने से सड़क के व्यवस्थित रूप में आवाजाही के लिए सुचारू होने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है।
आपदा की दृष्टि से ब्रह्मसैण का इलाका बेहद संवेदनशील स्थिति आ खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र में आवादी का विस्तार होने के साथ ही मकानों के निर्माण ने गति तो पकड़ी किंतु पानी की निकासी न होने के चलते स्थिति चिंताजनक बन गई है। समझा जा रहा है कि पानी की निकासी न होने के चलते अंदर ही अंदर पानी का रिसाव होने के चलते भू-धंसाव ने जोर पकड़ लिया है। इस तरह की स्थिति अच्छे संकेतों की ओर इशारा नहीं कर रही है। अब तो तमाम मकानोें पर भी खतरे की आशंका बढ़ गई है। इसके चलते इस क्षेत्र के लोगों की नींद तो उड़ने ही लगी है अपितु खतरे की जद में आए मकान स्वामियों के चेहरों की हवाइयां भी उड़ने लगी हैं। वैसे भी गोपेश्वर नगर के विस्तार के लिए भवनों समेत अन्य विकास योजनाओं के निर्माण का मलवा इसी इलाके के सड़क किनारे डाला जाता रहा है। इस तरह पानी की निकासी की व्यवस्था न होने के चलते मलबे का ढेर अब धंसाव का रूप लेने लगा है। हालात इसी तरह रहे तो इस कस्बे पर पड़ रही आपदा की मार अब बसागत के लिए खतरे का सबब बन गई है। इस दिशा में यदि ट्रीटमेंट के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य के खतरे कम नहीं है।अब देखना यह है कि सरकारी स्तर से भू-धंसाव के ट्रीटमेंट के लिए किस तरह की पहल कदमी की जाती है। इस पर ही ब्रह्मसैण इलाके के लोगों का भविष्य निर्भर करेगा।
