रुद्रप्रयाग के अर्णव शौर्य बिष्ट ने रचा नया मुकाम,ग्लोबलफॉउंड्रीज में बने इलेक्ट्रॉनिकस साइंटिस्ट।

रुद्रप्रयाग के अर्णव शौर्य बिष्ट ने रचा नया मुकाम,ग्लोबलफॉउंड्रीज में बने इलेक्ट्रॉनिकस साइंटिस्ट।

रुद्रप्रयाग:-24 अगस्त 2026

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सुरसाल गांव निवासी अर्णव शौर्य बिष्ट ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और निरंतर अध्ययन के बल पर उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। आईआईटी मुंबई से पीएचडी पूरी करने के बाद अर्णव का चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेमीकंडक्टर कंपनी ग्लोबल फॉउंड्रीज में बने इलेक्ट्रॉनिक्स साइंटिस्ट (GlobalFoundries, Singapore में Electronics Scientist) के पद पर हुआ है। उन्हें लगभग एक करोड़ रुपये सालाना पैकेज पर नियुक्ति मिली है।

अर्णव की शुरुआती पढ़ाई तिलवाड़ा क्षेत्र में हुई। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाईस्कूल स्तर पर उन्होंने उत्तराखंड में 13वीं रैंक हासिल की। उन्होंने कक्षा 10वीं की शिक्षा विद्या मंदिर सुमाड़ी से पूरी की। इसके बाद विद्या मंदिर बेलनी से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करते हुए उन्होंने प्रदेश में नौवीं रैंक प्राप्त की।
स्कूली शिक्षा के बाद अर्णव ने NIT श्रीनगर से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने IIT रुड़की में अध्ययन किया और अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए IIT मुंबई से पीएचडी पूरी की।

पीएचडी पूरी करने के बाद अर्णव का चयन GlobalFoundries Singapore में इलेक्ट्रॉनिक्स साइंटिस्ट के रूप में हुआ है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम करने वाली इस प्रतिष्ठित कंपनी में करीब एक करोड़ रुपये के वार्षिक पैकेज पर नियुक्ति मिलना उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और विशेषज्ञता को दर्शाता है। अर्णव की यह उपलब्धि खास तौर पर उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर उन्होंने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शिक्षा हासिल की और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

अर्णव की सफलता के पीछे उनके परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके पिता राजकीय इंटर कॉलेज चौरिया भरदार, रुद्रप्रयाग में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। वहीं उनकी माता प्राथमिक विद्यालय रामपुर में प्रधानाध्यापिका हैं। शिक्षा के माहौल में पले-बढ़े अर्णव ने लगातार मेहनत और अनुशासन को अपनी ताकत बनाया। उनकी उपलब्धि से परिवार, शिक्षकों और क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। अर्णव शौर्य बिष्ट की सफलता यह संदेश देती है कि पहाड़ की प्रतिभाएं भी दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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