उत्तराखंड में साल 2013 से खाली पड़ा है लोकायुक्त का पद,हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।
नैनीताल:-02 सितंबर 2026
उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर साल 2021 में गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पूर्व के आदेश के क्रम में रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया गतिमान है। सरकार ने ये भी कहा कि लोकायुक्त और उसके सदस्यों का पैनल तैयार कर खोजबीन समिति के सम्मुख रखी जाएगी। इसलिए सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया जाए. जिस पर कोर्ट ने सरकार को चार हफ्ते का समय देते हुए अगली सुनवाई तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
दरअसल, हल्द्वानी के गौलापार के रहने वाले रवि शंकर जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है। जबकि, लोकायुक्त संस्थान के नाम पर वार्षिक 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है।याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में लोकायुक्त नियुक्त होने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जा रहा है, लेकिन उत्तराखंड में आए दिन घोटाले और अनियमितताएं सामने आ रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि एक छोटे से मामले को भी नैनीताल हाईकोर्ट की टेबल पर लाना पड़ रहा है। जनहित याचिका में ये भी कहा गया है कि वर्तमान समय में राज्य की तमाम जांच एजेंसियां सरकार के अधीन है,जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के हाथों में है।
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नहीं है, जिसके पास यह अधिकार हो कि वो बिना शासन की पूर्वानुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजीकृत कर सके।स्वतंत्र या निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या फिर मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। लिहाजा, एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए काफी अहम है. इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाए। जिससे कि राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लग सके।अगर भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई लोकायुक्त में होगी तो न्यायालयों के कार्यभार में कमी आएगी। जबकि, उत्तराखंड में लोकायुक्त का पद साल 2013 से खाली पड़ा है। आज मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।
