लंपी रोग से बचाव को गोवंश का व्यापक टीकाकरण अभियान,160 से ज्यादा मवेशियों का टीकाकरण।
मेहलचौरी (गैरसैंण):-05 सितंबर 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला।
बरसात का मौसम ओर लगातार बढती उमस के बीच मवेशियों में संक्रामक लंपी रोग फैलने की आशंका के चलते पशुपालन विभाग व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चला रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी चमोली के निर्देश पर पशुओं में लंपी बीमारी की रोकथाम एवं पशुपालकों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राजकीय पशु चिकित्सालय मेहलचौरी एवं पशु सेवा केंद्र कुनीगाड की ओर से जागरूकता शिविर एवं टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है,जिसके तहत अब तक कल्याणा,बीना,फरसो व आगरचट्टी में अब तक 160 से ज्यादा पशुओं का टीकाकरण पूर्ण कर लिया गया है। जिनमें बीना में 63 कल्याणा में 61 व आगरचट्टी -फरसो में 40 मवेशियों का टीकाकरण किया गया,जिसमें कल्याणा के गौरी गोविंद गौशाला के 40 से ज्यादा गौवंश का टीकाकरण भी शामिल है।इस दौरान लगभग 150 पशुपालकों को पशुओं के लिए कृमिनाशक दवा भी वितरित की गयी।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उपासना ने पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य पर नियमित नजर रखने को कहा इस दौरान त्वचा पर गांठें,बुखार,दूध उत्पादन में कमी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सालय से संपर्क करने की सलाह दी गयी। इस अवसर पशुचिकित्सा फार्मेसी अधिकारी गंगा सिंह बिष्ट,पशुधन प्रसार अधिकारी दीपक नौटियाल,पैरावेट चंद्र सिंह,गणपति देवी आदि मौजूद रहे।
लंपी वायरस के लक्षण
इस बिमारी के मुख्य लक्षण त्वचा पर कठोर गांठे या फफोले उभर जाते हैं, जिससे पशु को तेज बुखार आता है साथ ही आंख व नाक बहने लगती है। इस दौरान पशु के दुग्ध उत्पादन में कमी ,सुस्ती और लंगड़ापन दिखाई देता है।
ऐसे फैलती है बिमारी
बरसात कर मौसम में मच्छर या अन्य कीटों के काटने के साथ ही मक्खियां इस बिमारी को फैलाने में माध्यम बनती हैं।
टीकाकरण ही बचाव
संक्रमण फैलने की संभावना वाले बरसात के मौसम में पशुओं का टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। साथ ही जितना संभव हो पशुओं को कीटो से काटने से बचाने के उपाय करने चाहिए। जिसके लिए गौशाला के आस पास सफाई ओर रसायनों का छिडकाव करते रहना चाहिए।
