फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के नेटवर्क पर उत्तराखंड एसटीएफ का प्रहार,यूपी का गन हाउस मालिक गिरफ्तार।
देहरादून:-07 सितंबर 2026
उत्तराखंड एसटीएफ ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मेरठ के एक गन हाउस मालिक शैलेन्द्र पुत्र राजपाल, निवासी मेरठ (उत्तरप्रदेश) को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की जांच में फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश,हरियाणा और उत्तराखंड से जुड़े होने की बात सामने आई है। मामले में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
थाना प्रेमनगर, देहरादून में फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया था। 15 जनवरी 2026 को इस मामले में आरोपी मनोज कुमार को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से फर्जी शस्त्र लाइसेंस, एक अवैध 30 बोर सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। जांच के दौरान पता चला कि मनोज कुमार के शस्त्र लाइसेंस को सिरसा से मेरठ और फिर देहरादून स्थानांतरित दर्शाया गया था।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि,पूछताछ और जांच के आधार पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच जारी है। साथ ही गिरफ्तार आरोपी शैलेन्द्र के खिलाफ मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में वर्ष 2024 का एक मुकदमा भी दर्ज है। इसके अलावा प्रेमनगर थाने में दर्ज वर्ष 2026 के फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में भी उसका नाम सामने आया है।
एसटीएफ ने जब सिरसा जिलाधिकारी कार्यालय से लाइसेंस का सत्यापन कराया तो सामने आया कि वहां से ऐसा कोई शस्त्र लाइसेंस जारी ही नहीं किया गया था। इसके बाद लाइसेंस को पूरी तरह फर्जी पाया गया। विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसटीएफ ने फर्जी लाइसेंस तैयार कराने में भूमिका पाए जाने पर शिवा शस्त्रागार, मेरठ के मालिक शैलेन्द्र पुत्र राजपाल को गिरफ्तार किया है. साथ ही आरोपी मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र का रहने वाला है।
बता दें कि, उत्तराखंड एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान चलाए हुई है। इसी कड़ी में 12 जून 2026 को काशीपुर में दर्ज केस की पड़ताल के दौरान रुद्रपुर से दो आरोपियों को अरेस्ट कर तीन अवैध हथियार,आठ कारतूस और दो फर्जी लाइसेंस बरामद किया गया था। मामले में पुलिस द्वारा सात आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
