नैनीताल के ज्योलीकोट दूषित पानी मामले में हाईकोर्ट ने डीएम,सीएमओ समेत जल संस्थान और निगम के अधिकारीयों को किया तलब।
नैनीताल:-07 सितंबर 2026
नैनीताल जनपद के ज्योलीकोट और उसके आसपास के गांवों गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों का उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर संज्ञान लिया है। पिछले तीन महीनों से क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने, दो लोगों की मौत होने और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने के मामले को लेकर बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने जनहित याचिका दायर की।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया और प्रभावितों के नि:शुल्क इलाज और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई। मामले की अलार्मिंग स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक और उत्तराखंड पेयजल निगम (कुमाऊं मंडल) के मुख्य अभियंता को 8 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है। अदालत ने इन अधिकारियों को जल जनित बीमारियों के प्रकोप से निपटने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और इस समस्या के स्थायी समाधान हेतु पूरी कार्ययोजना (रोडमैप) और ब्यौरे के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया है कि वे प्रभावित गांवों के निवासियों को तत्काल प्रभाव से स्वच्छ और संदूषण-मुक्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करें. हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि दूषित जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के कारण लोगों के जीवन पर संकट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसके चलते प्रशासनिक और विभागीय आला अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।
