उत्तराखण्ड में धीमी पड़ी मानसून की रफ्तार,एक बार फिर मौसम बिगड़ने के आसार,6 जिलों में बारिश का अलर्ट।
देहरादून:-10 सितंबर 2026
रिपोर्ट-डा. जयदेव पंवार।
दो दिन के ब्रेक के बाद उत्तराखंड में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 11 से 13 सितंबर के बीच कई पर्वतीय जिलों में तेज़ बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।
उत्तराखंड में भारी बारिश का सिलसिला फिलहाल धीमा पड़ चुका है, जिसके चलते पर्वतीय क्षेत्रों में बादल मंडरा रहे हैं जबकि कई जगहों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है। इसके अलावा मैदानी इलाकों में तेज धूप ने फिर गर्मी बढ़ा दी है। हालांकि आज गुरुवार से अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। बताते चलें प्रदेश से मानसून की जल्द विदाई होने वाली है जिसके कारण अब बारिश कम देखने को मिल रही है। आपको बता दें उत्तराखंड से मानसून सामान्य रूप से सितंबर के अंतिम सप्ताह में विदा हो जाता है जिसका विदाई का माह प्रारंभ हो चुका है।
आज 10 सितम्बर को प्रदेश के देहरादून,टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर व पिथौरागढ़ जिले में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है। जबकि अन्य सभी जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने व वर्षा का तीव्र से अति तीव्र दौर जारी रह सकता है जिसके लिए येलो अलर्ट रखा गया है।
11 सितम्बर को देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर व पिथौरागढ़ जिले में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है जिसके लिए येलो अलर्ट जारी रहने वाला है।
12 सितम्बर को देहरादून, बागेश्वर , उत्तरकाशी जिले में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है। इस दिन भी येलो अलर्ट रखा गया है।
13 सितम्बर को बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है, जबकि राज्य के पर्वतीय व मैदानी जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने एवं वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर होने की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर देखने को मिल सकते हैं। नैनीताल, भीमताल, भवाली और मुक्तेश्वर में घने बादल और कोहरे के साथ तेज बारिश की संभावना है।वहीं पिथौरागढ़ और बागेश्वर के संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। भागीरथी और भिलंगना नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों और यात्रियों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।
