तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद, बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली हिमालय से रवाना, अब मक्कूमठ में होंगे दर्शन।
रुद्रप्रयाग:-07 नवंबर 2026
पंच केदारों में से तृतीय केदार के नाम से विख्यात तुंगनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। जिसके बाद बाबा तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली हिमालय से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हुई।अब अगले 6 महीने तक भगवान तुंगनाथ के दर्शन शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में होंगे।
बता दें कि समुद्रतल से 3,680 मीटर यानी 12,073 फीट की ऊंचाई और चंद्रशिला की तलहटी में बसे तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया था। शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी हुई।
तुंगनाथ मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना एवं अनुष्ठान संपन्न कराए. कपाट बंद होने के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर पुण्य कमाया। वहीं, कपाट बंद करने के दौरान मंदिर परिसर बाबा तुंगनाथ के जयकारों और भक्तिमय माहौल से गुंजायमान रहा।
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हुई। आज डोली का प्रथम रात्रि प्रवास चोपता में होगा। इसके बाद 7 नवंबर को उत्सव डोली भनकुंड पहुंचेगी. वहीं, 8 नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में विराजमान होगी। इसके साथ ही शीतकाल में भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना मक्कूमठ में होगी।
तुंगनाथ धाम पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। हर साल देश-विदेश से काफी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
