जोन 6 में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलॉज में होगा बदलाव, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर प्रोजेक्ट्स का बढ़ेगा खर्च।

जोन 6 में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलॉज में होगा बदलाव, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर प्रोजेक्ट्स का बढ़ेगा खर्च।

उत्तराखंड (देहरादून)-06 दिसम्बर 2025

भारत सरकार की बीआईएस ने नया सीस्मिक मैप जारी किया है। जिसके तहत देश के सभी हिमालयी क्षेत्रों को जोन 6 में रखा है। यानी इन सभी क्षेत्रों को भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील करार दिया है। जबकि पुराने सीस्मिक मैप के अनुसार, उत्तराखंड को जोन 4 और जोन 5 में रखा गया था, लेकिन अब पूरे उत्तराखंड को जोन 6 में रख दिया गया है। नया सीस्मिक मैप जारी होने के बाद अब प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की नीति एक समान होगी। जिस दिशा में सरकार ने इस दिशा में अपनी रणनीतियां तैयार करने शुरू कर दी हैं। जिसके तहत मुख्य रूप से आवास विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग का क्या है रोडमैप?

इस विषय को लेकर आवास विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि अभी तक भूकंप की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखंड को जोन 4 और जोन 5 में रखा गया था। जिसके तहत प्रदेश में बिल्डिंग बायलॉज (Building Bylaws) लागू हैं। कई बार ऐसा देखा गया है कि लोग मल्टी स्टोरेज बिल्डिंग को संवेदनशीलता के साथ को रिलेट करते हैं, जो कि गलत है। ऐसे में अगर आप संवेदनशील क्षेत्र में है तो आपको भूकंपरोधी तकनीकी से बिल्डिंग बनाने होंगे। वर्तमान समय में जो बिल्डिंग बायलॉज लागू है उसी के अनुसार ही भूकंप रोधी तकनीकी, तीन मंजिला बिल्डिंग के साथ ही सौ मंजिला बिल्डिंग के लिए भी उपलब्ध है। जिसके तहत मैदानी क्षेत्रों में 7 से 8 मंजिला बिल्डिंग और पर्वतीय क्षेत्रों में तीन से चार मंजिला बिल्डिंग बनाने की अनुमति है।

साथ ही बताया कि नए सीस्मिक मैप की वजह से हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स में समस्याएं आने की संभावना है। हालांकि, इससे प्रोजेक्ट बन नहीं होंगे बल्कि प्रोजेक्ट बनाने में आने वाला खर्च बढ़ने की संभावना है। प्रमुख सचिव ने एग्जांपल देते हुए कहा कि टिहरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट जो तैयार किया गया है वो 8.5 मेग्नीट्यूड भूकंप को झेलने की क्षमता रखता है। ऐसे में अगर 8.5 मेग्नीट्यूड से अधिक का भूकंप आता है तो कुछ नहीं कहा जा सकता। वर्तमान समय में उत्तराखंड को जोन 6 में रखा गया है, ऐसे में 8.5 मेग्नीट्यूड से बड़ा भूकंप आने की संभावना बढ़ जाती हैं। ऐसे में अगर तेरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को 9 मेग्नीट्यूड भूकंप को खेलने के तहत विकसित करते हैं तो उसका खर्च ऊपर आएगा। ऐसे में किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर को अगर भूकंपरोधी बनाते हैं तो उसमें आने वाला खर्च बढ़ जाएगा।

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