शंकराचार्य विवाद के बीच बद्रीनाथ से बड़ा धार्मिक संकेत,गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने के लिए शंकराचार्य को भेजा निमंत्रण।

शंकराचार्य विवाद के बीच बद्रीनाथ से बड़ा धार्मिक संकेत,गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने के लिए शंकराचार्य को भेजा निमंत्रण।

चमोली-31 जनवरी 2026

प्रयागराज घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को लेकर उठे सवाल अब नए मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं। प्रयागराज से काशी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है। इसी बीच बद्रीनाथ धाम से जुड़ा एक बड़ा धार्मिक संकेत सामने आया है।

प्रयागराज में हुए घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद गहराया। इस बीच काशी पहुंचकर उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए अपनी मांगें रखीं।

विवाद के बीच अब उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। श्री बद्रीनाथ धाम के पुजारी समुदाय की शीर्ष पंचायत — श्री बद्रीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के लिए न्योता भेजा है। पंचायत अध्यक्ष पंडित आशुतोष डिमरी की ओर से भेजे गए इस न्योते में भगवान श्री बद्री विशाल के तेल कलश यानी गाडू घड़ा के ऋषिकेश से बद्रीनाथ धाम प्रस्थान में शामिल होने का आग्रह किया गया है। पुजारी समुदाय की ओर से यह न्योता शंकराचार्य के रूप में भेजा गया है।

धार्मिक जानकारों के मुताबिक, गाडू घड़ा यात्रा बद्रीनाथ धाम की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। ऐसे में शंकराचार्य के रूप में न्योता दिया जाना, उनके पद को लेकर चल रहे विवादों के बीच एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। गौरतलब है कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान ने देश की चार दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी। उत्तर दिशा की पीठ ज्योतिषपीठ, श्री बद्रीनाथ धाम है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शंकराचार्य के रूप में विराजमान हैं। अब देखना होगा कि योगी सरकार 40 दिन के अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाती है और इस धार्मिक संकेत का राजनीतिक और सामाजिक असर किस दिशा में जाता है।

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