उत्तराखंड के कई जिलों में एवलॉन्च का अलर्ट,प्रसाशन सतर्क,ऊंचाई वाले इलाकों में आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध।

उत्तराखंड के कई जिलों में एवलॉन्च का अलर्ट,प्रसाशन सतर्क,ऊंचाई वाले इलाकों में आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध।

उत्तराखंड-01 फरवरी 2026

पिछले वर्ष 28 फरवरी को माणा क्षेत्र में हुए हृदयविदारक ग्लेशियर हादसे की बरसी से पहले चमोली जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। भारी बर्फबारी और संभावित एवलांच (हिमस्खलन) के खतरों को देखते हुए जोशीमठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों की घोषणा की है। प्रशासन ने सीमा सड़क संगठन (BRO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में काम कर रहे सभी मजदूरों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए।

एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ ने पिछले वर्ष की त्रासदी का जिक्र करते हुए बताया कि उस हादसे में 8 लोगों की असामयिक मृत्यु हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिन्हें एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बचाया जा सका था। उन्होंने दो टूक कहा कि मानवीय जीवन की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है,इसलिए हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में पर्यटकों और ट्रैकरों के जाने पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मौसम सामान्य होने तक किसी को भी जोखिम भरे क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उत्तराखंड में ऊंचे स्थानों पर बर्फबारी होने की संभावनाओं के बीच पिछले दिनों केंद्र की तरफ से राज्य के कई जिलों में एवलॉन्च को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया। आने वाले दिनों में भी मौसम के करवट बदलने और कई जगहों पर बर्फबारी के साथ बारिश की भी संभावना व्यक्त की गई है। ऐसे में सबसे ज्यादा चिंता फिलहाल उन पर्यटकों को लेकर है जो प्रदेश में ट्रेकिंग या पर्वतारोहण के लिए पहुंचते हैं।

दरअसल, ऊंचे स्थानों पर मौसम बदलने की स्थिति में एवलॉन्च का खतरा रहता है। इन हालातो में ट्रेकिंग या पर्वतारोहण एक बड़ा खतरा बन जाता है। जिसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारी को अलर्ट वाले जिलों में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।

खासतौर पर उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे जिलों में 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए केंद्रीय एजेंसी डिफेंस जिओ-इन्फार्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) चंडीगढ़ की ओर से एवलॉन्च अलर्ट जारी होते रहे हैं।इन इलाकों में आमतौर पर मानवीय गतिविधियां कम होती हैं। ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के शौकीन यहां पहुंचकर जोखिम उठाते हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मौसम विभाग और केंद्र से मिलने वाले अलर्ट के आधार पर लगातार जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा ऊंचे स्थानों पर मौसम अचानक बदलता है। बर्फ के ढलान पर जमी कमजोर परतें एवलॉन्च का कारण बन सकती हैं. ऐसे में ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों के लिए विशेष एहतियात बरतना बेहद जरूरी है।अलर्ट की स्थिति में ऊंचे इलाकों में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारियों को स्थानीय हालात के अनुसार निर्णय लेने को कहा गया है।

जनवरी के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड समेत पूरे उत्तर भारत में भारी बर्फबारी और बारिश देखने को मिली। पहाड़ों पर बर्फ की मोटी चादर जम गई। मैदानी इलाकों में भी तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी ऐसा ही मिजाज बना रह सकता है। यही वजह है कि प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता है।

उत्तराखंड में पहले भी एवलॉन्च के चलते कई दुखद घटनाएं हो चुकी हैं। फरवरी 2021 में चमोली जिले के रैणी इलाके में ग्लेशियर टूटने के बाद आई आपदा में कई मजदूरों और स्थानीय लोगों की जान चली गई थी। हालांकि, वह घटना केवल एवलॉन्च नहीं बल्कि ग्लेशियर ब्रेक का मामला था, लेकिन पहाड़ी इलाकों में बर्फ और मलबे के अचानक गिरने के खतरों को उसने उजागर कर दिया। इसी तरह अक्टूबर 2022 में उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा पर्वत पर अभ्यास के दौरान एवलॉन्च की चपेट में आने से नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के कई प्रशिक्षु फंस गए थे। जिसमें कुछ पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

इसके अलावा, हर साल सर्दियों और वसंत के मौसम में उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में छोटे-बड़े एवलॉन्च की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जिनमें कई बार ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों को रेस्क्यू करना पड़ता है। कुछ मामलों में जान भी गंवानी पड़ी है। यही कारण है कि प्रशासन अब पहले से ज्यादा सतर्कता बरत रहा है।

आपदा प्रबंधन विभाग की अपील है कि पर्यटक और साहसिक खेल प्रेमी मौसम और प्रशासन की एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें। अलर्ट के दौरान जोखिम भरे ट्रैक और पर्वतारोहण अभियानों से बचें। पहाड़ों की सुंदरता जितनी आकर्षक है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है। इसलिए रोमांच के साथ-साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना हर पर्यटक और पर्वतारोही की जिम्मेदारी है।

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