शंकराचार्य पद पर गहराया विवाद,प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा नोटिस।

शंकराचार्य पद पर गहराया विवाद,प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा नोटिस।

प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)-20 जनवरी 2026

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर यूपी सरकार और प्रशासन सख़्त रुख में दिखाई दे रहे हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने माघ मेला शिविर में शंकराचार्य शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की अवहेलना बताया है।

उत्तर प्रदेश सरकार और ज्योतिष्पीठ से जुड़े शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक औपचारिक नोटिस जारी करते हुए उनके द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। यह नोटिस माघ मेला क्षेत्र में लगाए गए उनके शिविर के बोर्ड पर ‘शंकराचार्य’ शब्द के प्रयोग को लेकर भेजा गया है, जिसे प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना की श्रेणी में रखा है।

माघ मेला शिविर बना विवाद की वजह⤵️

प्रयागराज में आयोजित माघ मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है,जहाँ लाखों श्रद्धालु, संत और धर्माचार्य एकत्र होते हैं। इसी मेला क्षेत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शिविर स्थापित है। मेला प्राधिकरण के अनुसार, शिविर के बाहर लगाए गए बोर्ड में उन्हें “ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य” के रूप में दर्शाया गया है। इसी शब्दावली को लेकर प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि शंकराचार्य पद से संबंधित मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित करना न्यायालय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जा सकता है।

नोटिस में क्या कहा गया है⤵️

प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है-“शंकराचार्य पद का मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक इस विषय में कोई स्पष्ट आदेश पारित नहीं होता, तब तक धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में किसी भी व्यक्ति का पट्टाभिषेक अथवा सार्वजनिक घोषणा नहीं की जा सकती। इसके बावजूद माघ मेला शिविर के बोर्ड में आपने स्वयं को शंकराचार्य घोषित कर रखा है, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना है।

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