गंगोत्री धाम में “पंचगव्य” गौ मूत्र और गंगाजल ग्रहण करने के बाद होगा प्रवेश।
उत्तराखंड-23 मार्च 2026
देवो की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में हर वर्ष चलने वाली उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा का आगाज़ एक बार फिर होने जा रहा है, लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है. चार धाम यात्रा में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में गैर हिंदूओं के प्रवेश को लेकर श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के एफिडेविट देने के बयान के बाद गंगोत्री मंदिर समिति की तरफ से भी गैर हिंदुओं के दर्शन करने को लेकर बयान सामने आया है जिसमें समिति के सचिव ने गैर हिंदुओं को पंचगव्य पान के बाद यानि गौ मूत्र और गंगाजल पीने के बाद ही मंदिर में दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी साथ ही गंगोत्री मंदिर समिति ने बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति की एफिडेविट देने की बात को उनकी निजी राय बताया है।
चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले जहाँ एक तरफ़ बदरी-केदार मंदिर समिति ने उनके अधीन आने वाले उत्तराखंड के दो महत्वपूर्ण धाम बदरीनाथ और केदारनाथ में गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने और एफिडेविट व्यवस्था लागू करने को लेकर अपनी बोर्ड बैठक में फैसला लिया है तो वही चारों धामो में से बचे हुए दो धाम गंगोत्री और यमुनोत्री धाम का संचालन करने वाली चार धाम महापंचायत ने इन दोनों धमों में गैर (हिंदुओं) सनातनियों के परिबंध को एक बिल्कुल नई और अनोखी व्यवस्था लागू करने का एलान किया है।
✅गंगोत्री में “पंचगव्य” ग्रहण से होगा प्रवेश ⤵️
श्रीपंच गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव और चार धाम पंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया की गंगोत्री धाम में ग़ैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध के कानूनी और संवैधानिक पहलू को लेकर एक कमेटी बनाई गई हैं जिसमे क़ानून के जानकारो को शामिल किया गया हैं, जो आगामी 10 दिन में अपनी रिपोर्ट दे देगी और यह स्पष्ट हो जाएगा की गंगोत्री में ग़ैर सनातनियों के प्रवेश को संवैधानिक और क़ानूनी तरीक़े से प्रतिबंध किया जाएगा। वहीं इसके अलावा गंगोत्री में ग़ैर सनातनियों के प्रतिबंध के धार्मिक पहलू पर भी ज़ोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा की गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले पंचगब्य की व्यवस्था रखी जाएगी जो इसे ग्रहण करता है उसे सनातन में आस्था रखने वाला माना जा सकता है।
✅पंचगव्य क्या होता है और इसकी क्या मान्यता है⤵️
पंचगव्य एक संस्कृत शब्द का है जो पंच यानी पाँच और गव्य यानी गाय से प्राप्त पदार्थ है। हिन्दू परंपरा में गाय से प्राप्त पाँच पदार्थों का मिश्रण पंचगव्य है जिसमे दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर शामिल होते हैं। इसे पौराणिक मंत्रोचारण और वैदिक विधि से एक निच्छित मात्रा में मिश्रित किया जाता है। ये पाँचों तत्व मिलकर “पंचगव्य” बनाते हैं, जिसे धार्मिक, आयुर्वेदिक और कृषि दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार गंगाजल और शहद भी बेहद पवित्र माना जाता है और पंचगव्य में गंगाजल में शहद भी शामिल होता है। धार्मिक मान्यता की बात करे तो हिन्दू धर्म में गाय को “माता” का दर्जा दिया गया है,इसलिए पंचगव्य को अत्यंत पवित्र माना जाता है। पूजा-पाठ, यज्ञ और संस्कारों में इसका उपयोग शुद्धिकरण (पवित्रीकरण) के लिए किया जाता है। मान्यता है कि पंचगव्य के सेवन या स्पर्श से शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है। कई धार्मिक ग्रंथों में इसे पापों के नाश और पुण्य प्राप्ति से जोड़ा गया है। आयुर्वेद में भी पंचगव्य का बड़ा महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार पंचगव्य औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला माना गया है। कुछ पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग त्वचा रोग, पाचन समस्या आदि के लिए बताया गया है। तो वहीं कृषि में भी विशेष तौर पर जैविक खेती में पंचगव्य का उपयोग एक प्राकृतिक उर्वरक (fertilizer) और कीटनाशक के रूप में किया जाता है।
✅गैर सनातनीयों के लिए घर वापिसी का मौका⤵️
श्रीपंच गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव और चार धाम पंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा है की जो गौ माता को मानता है और पंचगब्य का आचमन करता है वो सनातनी हैं। गंगोत्री मंदिर समिति का साफ़ तौर पर कहा हैं की भारत में रहने वाले हिंदू , जैन, सिख और बोद्ध सभी सनातन के अंतर्गत आते हैं इसके अलावा किसी धर्म का व्यक्ति यदि गंगोत्री धाम आता है तो वो पंचगब्य ग्रहण करता है तो उसके लिए यह घर वापसी का भी एक मौका बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत देश में रहने वाले दूसरे समुदाय के वो लोग जो लोग गाय को पूजनीय नहीं मानते है उनके पूर्वज भी पहले हिंदू और सनातनी रहे है। ऐसे में इनलोगों के लिए यह घर वापिसी का बेहतर मौका बन सकता है वो गंगोत्री धाम आ के पंचगव्य ग्रहण कर के और गंगा माँ में डुबकी लगा कर सनातन धर्म में घर वापिसी कर सकता है।
✅यमुनोत्री में 24 मार्च को लिया जाएगा निर्णय⤵️
वही इसके अलावा यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया की यमुनोत्री धाम मंदिर समिति भी चारों धामो में गैर सनातनियों को प्रतिबंधित करने के पक्ष में है। हालांकि यमुनोत्री मंदिर समिति इस संबंध में अपना स्पष्ट पक्ष आगामी चैत्र शुक्ल षष्ठी जो की माँ यमुना का अवतरण दिवस भी है और यह ख़ुशी मठ में मनाया जाएगा। उसी दिन कपाट खुलने का समय भी तय होगा साथ ही यमुनोत्री मंदिर में प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम क्या होंगे ताकि ग़ैर सनातनियों के प्रवेश पर परिबन्ध लगता जा सके उसको लेकर भी स्पष्ट तौर पर मंदिर समिति अपना प्लान बताएगी।
उत्तराखंड प्रदेश की आजीविका को मजबूत रखने वाली चार धाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, लेकिन हरिद्वार से उठी गैर हिंदुओं के प्रवेश की ये आग अब चारों धामो मे भी लगती नजर आ रही है, एक तरफ भाजपा सरकार के अधीन (BKTC) का आदेश की गैर हिन्दुओं को आस्था का शपथ पत्र देना व दिखाना होगा वही अब तीर्थ पुरोहितों के नए फरमान की गंगाजल और गौमूत्र से तैयार पंचगव्य को ग्रहण करना ही होगा तभी दर्शन हो सकेंगे, ऐसे में प्रदेश की राजनीति में विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका साथ ही धामी सरकार के लिए यात्रा शुरू होने से पहले नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है, ऐसे में सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार का विरोध करते नजर आ रहे है, वही भाजपा इस पर अपनी सफाई दे रही है।
