हरिद्वार कुम्भ क्षेत्र में गैर हिन्दुओं की एंट्री हो बैन-हेमंत द्विवेदी,अध्यक्ष BKTC.
हरिद्वार-17 जनवरी 2026
हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग ने उत्तराखंड की राजनीति और धार्मिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।गंगा सभा और कुछ संतों की ओर से उठाई गई इस मांग का अब श्री बदरी केदार मंदिर समिति नें भी समर्थन किया हैं।श्री बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें मीडिया को दिए अपने एक बयान में कहा कि पूरे कुम्भ क्षेत्र में गैंर हिन्दुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगानी चाहिए,क्योंकि यह पवित्र स्थल करोड़ों हिन्दुओं का आस्था का केंद्र हैं।
1916 का कानून आज भी प्रभावी हैं’⤵️
हरिद्वार में कुंभ के दौरान भी कई विदेशी आते हैं जो भारतीय संस्कृति को देखना समझना चाहते हैं.लेकिन कुछ धर्म विशेष के लोगों के लिए यहां प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं.
हर-की-पौड़ी में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले उपविधानों (बायलॉज) का हवाला देते हुए श्री बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें कहा कि ”गंगा के प्रति सनातनियों की आस्था और विश्वास को देखते हुए सभी घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर उत्तराखंड सरकार को पाबंदी लगानी चाहिए.”उन्होंने कहा कि वर्ष 1916 में गंगा सभा और तीर्थ पुरोहितों की मांग पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में म्युनिसिपल बायलॉज बनाया था जो आज भी प्रभावी हैं.उन्होंने बताया कि इस बायलॉज के तहत एक बड़े क्षेत्र को गैर-हिंदू निवास के लिए वर्जित किया गया था. उनके अनुसार, हरिद्वार के एक बड़े हिस्से में आज भी केवल हिंदू आबादी निवास करती है.हेमंत द्विवेदी ने कहा कि 1916 से पहले हरिद्वार के इन इलाकों में गैर-हिंदू भी रहते थे, लेकिन एक्ट बनने के बाद वहां से पलायन हुआ।उनका कहना है, ”उस समय श्रद्धालुओं की संख्या सीमित होती थी इसलिए छोटे क्षेत्र में व्यवस्थाएं संभाली जा सकती थीं. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं, ऐसे में बड़े क्षेत्र की आवश्यकता है.”
सरकार द्वारा एक बड़े क्षेत्र को कुंभ क्षेत्र घोषित करने की बात करतें हुए BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें कहा कि “अगर वह कुंभ क्षेत्र है तो उसे हिंदू क्षेत्र घोषित करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा उन क्षेत्रों में पड़ने वाले धार्मिक स्थलों और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश निषेध होना चाहिए।”‘उन्होंने कहा कि ‘पहले जो नियम और कानून बनाए गए थे, उन्हें सौ वर्षों बाद नए रूप में पुनर्जीवित करके प्रस्तुत करने की आवश्यकता है.”उनके मुताबिक़ यह मांग किसी के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि अपनी ‘सुरक्षा और पवित्रता’ को बनाए रखने को लेकर है।
