पूर्व CM हरीश रावत नें गुरूद्वारे में की जूता सेवा,सिखों पर हरक सिंह रावत के विवादित बोल के लिए मांगी माफ़ी।
देहरादून-09 दिसम्बर 2025
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के बयान से उपजे विवाद को शांत करने का प्रयास किया. हरदा ने सोमवार को देहरादून के आढ़त बाजार गुरुद्वारा में जोड़ा घर जहां संगत के जूते होते हैं, वहां सेवा की और लंगर रसोई में सेवा भी की. उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होते हुए क्षमा मांगी है. हरीश रावत ने गुरु साहिब के चरणों में प्रसाद भी चढ़ाया.
हरीश रावत ने गुरुद्वारा में की जूता सेवा: इस मौके पर उन्होंने कहा कि जो गलती हमसे हुई है, उस भूल सुधार की माफी गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर मांगी गई है. उन्हें बहुत खुशी हुई है कि सिख संगतों और गुरुद्वारा सिंह सभा ने भगवान नानक देव जी के कुछ वचन सुनाकर हमारे मन व भावनाओं को पवित्र किया है. समाधान स्वरूप हमने लंगर सेवा की है और उसके बाद जोड़ा घर में भी सेवा की.
जिस भी हमारे साथी से यह गलती हुई है,उसको लेकर क्षमा मांगी गई है. हम समाज के सभी वर्गों का सम्मान करते आए हैं. विशेषकर सिख समाज देश का सिरमौर है और पराक्रम, परंपराओं और शौर्य का प्रतीक रहा है. आज भी सिख समाज अन्नदाता के रूप में राष्ट्र के निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रहा है. हमारे साथी की कभी कोई ऐसी भावना नहीं रही, लेकिन कभी शब्द इधर-उधर हो जाते हैं. इस गलती के लिए आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे नतमस्तक होकर क्षमा मांगी गई और प्रायश्चित किया गया.
–हरीश रावत, पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता-
हरक सिंह रावत ने सिख समाज पर विवादित टिप्पणी कर दी थी: दरअसल हाल ही में कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने सिख अधिवक्ता के के खिलाफ टिप्पणी कर दी थी. हरीश रावत ने इस पर दुख जताते हुए हरक सिंह की गलती को सुधार और सद्बुद्धि की प्रार्थना की है. हरक सिंह रावत ने अधिवक्ताओं के धरने पर एक वकील पर टिप्पणी करते हुए सिख समुदाय के बारे में कुछ अमर्यादित शब्द कह दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले में डैमेज कंट्रोल करते हुए गुरुद्वारा पहुंचकर जोड़ा घर और लंगर रसोई में सेवा की है.
सीएम धामी ने भी हरक को नसीहत दी: इधर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी हरक सिंह रावत को नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय के ऊपर इस तरह की टिप्पणी नहीं होनी चाहिए. सिख धर्म गुरुओं का एक बहुत बड़ा इतिहास है जिन्होंने धर्म, समाज, संस्कृति की रक्षा के लिए और समाज की आन बान के लिए अपने प्राणों को देने में थोड़ी भी हिचकिचाहट नहीं की
