उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति मामले पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई,3 अप्रैल को होगी सर्च कमेटी की बैठक,कोर्ट में बताना होगा बैठक से क्या निकला निर्णय।

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति मामले पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई,3 अप्रैल को होगी सर्च कमेटी की बैठक,कोर्ट में बताना होगा बैठक से क्या निकला निर्णय।

नैनीताल-01 अप्रैल 2026

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सरकार से कहा है कि 3 अप्रैल को जो सर्च कमेटी की बैठक होनी है, उस बैठक में लिए गए निर्णय को आगामी 8 अप्रैल को शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करें।

आज यानी 1 अप्रैल को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि 3 अप्रैल को सर्च कमेटी की बैठक होनी है, इसलिए उन्हें समय दिया जाए। जिस पर कोर्ट ने कहा कि एक साल पहले भी सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए समय मांगा गया था, लेकिन अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई। पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए तीन महीने का अंतिम अवसर देते हुए ये भी कहा था कि जब तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो जाती, उसके कार्यालय के कर्मचारियों को वहां से वेतन न दिया जाए। चाहे तो सरकार उनसे अन्य विभाग से कार्य लेकर उन्हें भुगतान कर सकती है। इससे पहले राज्य की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए उन्हें 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया जाए. साथ ही कर्मचारियों को उसके कार्यालय से वेतन देने की मांग की गई थी। सरकार की तरफ से ये भी कहा गया था कि लोकायुक्त के कार्यालय में 26 कर्मचारी हैं, जिसमें से 9 रेरा में कार्य कर रहे हैं, उनको वहीं से वेतन दिया जाता है। इसके अलावा 17 कर्मचारी लोकायुक्त के कार्यालय में है.ल, इसलिए इनका वेतन लोकायुक्त कार्यालय से देने के आदेश दिए जाएं। जिस पर कोर्ट ने सरकार को लोकायुक्त नियुक्त करने के लिए 3 महीने का अंतिम अवसर दिया था। जिसके तहत अब 3 अप्रैल को जो सर्च कमेटी की होने जा रही है. जिसके बाद सरकार को पूरा जवाब 8 अप्रैल को कोर्ट में देना होगा।

➡️क्या है मामला?⤵️

दरअसल, हल्द्वानी के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की। जबकि, संस्थान के नाम पर वार्षिक 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं. याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश और कर्नाटक में लोकायुक्त की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामले को भी हाईकोर्ट में लाना पड़ रहा है। जनहित याचिका में ये भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नहीं है, जिसके पास ये अधिकार हो कि वो बिना शासन की पूर्वानुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजीकृत कर सकें। इसके अलावा कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है. इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति जल्द की जाए।

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