हाइकोर्ट:-उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति में सीधी भर्ती व पदोन्नति का लाभ न देने के मामले पर हुई सुनवाई।

हाइकोर्ट:-उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति में सीधी भर्ती व पदोन्नति का लाभ न देने के मामले पर हुई सुनवाई।

नैनीताल-23 मार्च 2026

उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति में सीधी भर्ती व पदोन्नति के मामले पर दायर कई याचिकाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई। मामले को सुनने के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जो शपथ पत्र पेश किया गया है, अगर उस पर आपको कुछ कहना है तो दो हफ्ते के भीतर अपना शपथ पत्र कोर्ट में करें। अब पूरे मामले में कोर्ट 6 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

आज इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई. इस दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि उनकी ओर से इनकी वरिष्ठता सूची जारी कर दी गई है। वहीं, मामले में अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से दायर याचिकाओं में कहा है कि उनको पहले वरिष्ठता दी जाए, क्योंकि उनका चयन साल 2005 में सीधी भर्ती से हुआ।

वहीं, कई अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि उनको पहले वरिष्ठता पर रखा जाए, क्योंकि वे प्रमोशन से आए हुए हैं, उनकी नियुक्ति दशकों पहले हो चुकी है, उसका लाभ उन्हें अभी तक नहीं मिला है। दरअसल, उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति के मामले पिछले कई सालों से अटके पड़े हैं. इसको लेकर शिक्षक लंबे समय से सरकार से मांग करते आ रहे हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रधानाचार्य पद की सीधी भर्ती को निरस्त किया जाए। इस पद को पदोन्नति से भरा जाए, न कि सीधी भर्ती से। क्योंकि वे सालों से काम करते आ रहे हैं. सरकार ने उनको इसका लाभ नहीं दिया, जिस पर अभी तक कोई विचार नहीं किया गया। जबकि, कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

उनको ग्रेच्युटी और पेंशन का लाभ मिल चुका है. उनकी भी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित आदेश भुवन चंद्र कांडपाल के केस के आधार पर की जाए। क्योंकि, सरकार ने उन्हें पदोन्नति दी है। इस मामले में त्रिविक्रम सिंह, लक्ष्मण सिंह खाती समेत अन्य ने याचिकाएं दायर की है। जबकि, ये साल 1990 से कार्य कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कि गई सेवाओं का लाभ तक नहीं दिया गया है।

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