एफडीए की ओर से बंद कराए गए खाद्य दुकानों को बिना नोटिस खोला तो दर्ज होगा मुकदमा।
देहरादून-12 फरवरी 2026
उत्तराखंड राज्य में आगामी त्यौहारी सीजन और चारधाम यात्रा को देखते हुए उत्तराखंड खाद्य संरक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। त्यौहारी सीजन के दौरान लोगों को शुद्ध और बेहतर खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो साथ ही चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी साफ-सुथरा भोजन उपलब्ध हो सके इसको लेकर खाद्य संरक्षा विभाग नए प्रयास करने जा रहा है। ताकि अनसेफ फूड की वजह से लोगों के बीमार होने के मामले पर कमी लाया जा सके। आखिर क्या है खाद्य सुरक्षा विभाग की रणनीति, किन-किन पहलुओं पर दिया जा रहा है जोर? देखिए इस रिपोर्ट में⤵️
किसी भी त्यौहारी सीजन के दौरान मिलावट खोरी के मामले काफी अधिक सामने आते हैं। खासकर दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट काफी अधिक की जाती है क्योंकि उनकी डिमांड सबसे अधिक रहती है जिसको देखते हुए उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन अलर्ट हो गया है। दरअसल, आगामी त्यौहारी सीजन के साथ ही उत्तराखंड चारधाम की यात्रा भी शुरू हो रही है जिसके चलते खाद्य संरक्षा विभाग की चुनौतियां और अधिक बढ़ गई है। यही वजह है कि खाद्य संरक्षा विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्य योजना तैयार करने के साथ ही अभी से ही सैंपल कलेक्ट करने और छापेमारी की कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं। ताकि त्यौहारी सीजन के साथ ही चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सके।
हर साल खाद्य संरक्षा विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जाती है। बिना लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे खाद्य प्रतिष्ठानों को बंद भी कराया जाता है साथ ही उनके खाने, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल भी लिए जाते हैं लेकिन छापेमारी की अभियान और त्यौहारी सीजन समाप्त होने के बाद ही न सिर्फ विभाग ढीला पड़ जाता है बल्कि खाद्य प्रतिष्ठान भी मिले नोटिस को दरकिनार कर फिर से अपना प्रतिष्ठानों का संचालक शुरू कर देते है। जिसको देखते हुए विभाग ने निर्णय लिया है कि जब भी किसी प्रतिष्ठान को नोटिस जारी कर बंद कराया जाएगा, तो उसकी एक कॉपी नजदीकी थाने में भी दी जाएगी। ऐसे में अगर बिना व्यवस्थाओं को दुरुस्त की प्रतिष्ठान फिर से संचालित होते हैं तो उन पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
वही, एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि बीते दिन फूड सेफ्टी अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। बैठक के दौरान अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि जितने भी फूड वेंडर्स हैं उनको प्रॉपर ट्रेनिंग दे गई जाए। कि किस तरह से यात्रियों को भोजन परोसना है, उनका लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन दुकान में लगा रहे, ताकि यात्री सही जगह पर ही खाना खा सके और अनहाइजीनिक स्थिति उत्पन्न ना हो। ऐसे में सभी जिलों में फूड सेफ्टी अधिकारियों को इंस्पेक्शन शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं। प्रदेश में मौजूद मोबाइल टेस्टिंग वैन के जरिए लगातार सैंपलिंग की जाती रहे।
तो वही, खाद्य संरक्षा विभाग के उपायुक्त गणेश चंद्र कंडवाल ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा से पहले होली और नवरात्र भी आने वाले हैं। जिसको देखते हुए अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए है। इसके साथ ही जिलों में फूड सेफ्टी डिस्प्ले बोर्ड और लाइसेंस को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाने के निर्देश आयुक्त की ओर से दिए गए हैं। सिर्फ त्यौहारी सीजन पर ही नहीं बल्कि वेडिंग सीजन के दौरान भी जब दूध और दूध से बने उत्पादों की डिमांड बढ़ जाती है। उस दौरान अन्य राज्यों से दूध और दूध से बने उत्पादों को लाने वाले वाहनों की चेकिंग करें।
किसी भी तेल को बार-बार इस्तेमाल करने से खाने की क्वालिटी काफी अधिक खराब हो जाती है। जो लोगों को नुकसान पहुंचती है। यही वजह है कि आई ट्रेड इंडिया के तहत यूज्ड तेल को रूसे करने पर लगाम लगाए जाने को लेकर एफडीए की ओर से तमाम पहल की जा रहे हैं। ज्यादा जानकारी देते हुए उपायुक्त गणेश चंद्र कंडवाल ने कहा कि पिछले साल चारधाम यात्रा मार्गों के प्रमुख पड़ावों पर होटल और खाद्य प्रतिष्ठान चलाने वाले लोगों के साथ बैठक की गई थी। साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को टीपीएम यानी टोटल पोलर कंपाउंड मीटर्स भी दिए गए है। ताकि खाद्य प्रतिष्ठानों में जाकर ये चेक करें कि वो तेल खाने योग्य है या फिर नहीं? यही नहीं, यूज्ड हो चुके तेलों के निस्तारण के लिए एग्रीगेटर के माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पहले चरण में गढ़वाल मंडल के तमाम क्षेत्रों में इसकी पहल शुरू की गई लिहाजा अब कुमाऊं मंडल में मौजूद रिसॉर्ट और खाद्य प्रतिष्ठानो तक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
साथ ही बताया कि यूज्ड तेल को बार-बार इस्तेमाल करने के मामले पर फूड सेफ्टी अधिकारी की ओर से सैंपल लिया जाता है और उसकी जांच की जाती है ऐसे में अगर तेल अनसेफ पाया जाता है। तो फिर सख्त कार्रवाई की जाती है जिसमें सजा और पेनल्टी शामिल है। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से किसी भी खाद्य प्रतिष्ठान को कोई निर्देश दिए गए हैं, बावजूद इसके उन निर्देशों का अनदेखी किया जाता है तो फिर पेनल्टी की कार्रवाई की जाती है। विभाग की ओर से तीन तरह की कार्रवाई की जाती है जिसमें एजुकेट करना, एनफोर्समेंट करना और फिर कार्रवाई करना है।
