कुनीगाड के कोठा में गुलदार ने बनाया गाय को निवाला,सीमांत क्षेत्र में दो सप्ताह में घटी 7 घटनाओं में 13 गौवंश की मौत।

कुनीगाड के कोठा में गुलदार ने बनाया गाय को निवाला,सीमांत क्षेत्र में दो सप्ताह में घटी 7 घटनाओं में 13 गौवंश की मौत।

विभाग की खानापूर्ती व जनप्रतिनिधियों की चुपी पर ग्रामीणों में नाराजगी,मुआवजा मिलने में देरी बिगाड रही काश्तकारों की आर्थिकी।

मेहलचोरी (गैरसैण)- 07 जनवरी 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला

विकासखंड गैरसैंण के मेहलचोरी क्षेत्र में गुलदारों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है ।मंगलवार की रात कुनीगाड क्षेत्र के कोठा गांव के राजेंद्र राम पुत्र ख्यालीराम की गौशाला में बंधी गाय को गुलदार ने निवाला बना डाला । दिनों-दिन गुलदार के बढ़ते आतंक को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को भी मिल रही है।एक तरफ वन विभाग जहां विभागीय खानापूर्ती में लगा है , वहीं मामले में प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधियों को छोड़ क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि गुलदार की घटनाओं को लेकर फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाए हुए हैं।

ब्लॉक स्तरीय त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भी मामले को लेकर कोई आवाज उठाने की जहमत उठाना अब तक जरूरी नहीं समझा है।जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को लेकर भी आम ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है । कोठा में गुलदार के ताजे हमले को लेकर प्रधान कुमारी ममता बिष्ट व क्षेत्र पंचायत सदस्य हंसी रावत ने वन विभाग के अधिकारीयों से बात कर अभिलंब पिंजरा लगा कर हिंसक गुलदार को ट्रैप करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है की गढ़वाल व कुमाऊं के सीमांत इस क्षेत्र में पिछले दो हफ्तों में अब तक गोवंश पर गुलदार के कुल 7 हमले की घटनाएं घट चुकी हैं । जिसमें 13 गोवंश को अपनी जान गंवानी पड़ी है । जनपद अल्मोड़ा के चौखुटिया ब्लॉक के पुरानालोहवा व परसारा गांव में दो-दो गायें जबकि गैरसैंण ब्लॉक के रंगचौणा में 1, ऊजिटिया में 2 ,घनियाली गांव में 2 ,भंडारीखोड में 3 व कोठा में 1 गाय को गुलदार गौशाले का दरवाजा तोड़कर निवाला बन चुका है । इसके साथ ही क्षेत्र के विभिन्न गांवों में गुलदार की लगातार सक्रियता चिंता का सबब बनी हुई है।गौरतलब है की दुधारू गायों के गुलदार के हमले में मारे जाने से दूध बेचकर परिवार चलाने वाले काश्तकारों पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है।

मामले में विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत 2023 में गुलदार के हमले में मारे गये मवेशियों की कुल संख्या का आधा मुआवजे भी अभी तक नहीं मिल पाया है , यही स्थिति 2024 व 2025 में मारे गये मवेशियों के मुआवजे की भी है । गुलदार के हालिया हमलों के बाद वन विभाग द्वारा फिलहाल घनियाली गांव व ऊजिटिया में लगाए गए पिंजरों में गुलदार के ट्रैप होने का इंतजार किया जा रहा है ।

मैदानी क्षेत्रों से लाकर पहाडों में छोडे जाने की आशंका⤵️

गुलदार के अब तक के सभी हमलों में एक जैसी घटना देखने में आयी है ।जिसमें गुलदार गौशालों के दरवाजे तोडकर गायों को ही निवाला बना रहा है ,जबकि कुछ गौशालाओं में बंधी भैंस पर हमला नहीं किया गया । वहीं गांवों के नजदीक लंबे समय से रह रहे निराश्रित घुम रहे गोवंश पर भी गुलदार हमले नहीं कर रहा है । जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि गुलदार मैदानी क्षेत्रों से लाकर यहां छोडे गये हैं । गुलदारों की अत्यधिक संख्या भी इस ओर ईशारा कर रही है ।

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