प्रकृति,संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ने का संदेश:उत्तराखंड में तीन दिवसीय बसंतोत्सव उत्सव का आगाज।
देहरादून-27 फरवरी 2026
देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, संगीत और इतिहास की जीवंत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की सहभागिता और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने प्रदेशवासियों से प्रकृति,संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया।
हर साल की तरह इस साल भी लोकभवन में वसंतोत्सव का आयोजन किया गया है, लगभग तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में प्रकृति व आत्मिक जुड़ाव भी देखने को मिल रहा है. आपको बता दे यह आयोजन 27 फरवरी से शुरु होकर 1 मार्च तक चलने वाले राजयपाल की अध्यक्षता में इस वसंतोत्स्व में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओ, संगीत और इतिहास की जीवंत झलक भी देखने को मिल रही है. साथ ही इस आयोजन में विभिन्न विभागों की सहभागिता, विभिन्न प्रकार के फूल और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र भी बन रही है।
जहां एक ओर आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, संगीत और इतिहास की जीवंत झलक देखने को मिली, तो वहीं कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की सहभागिता और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया, इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने प्रदेशवासियों से प्रकृति,संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि आयोजन में नृत्य, गीत और बेंड की प्रस्तुतियां सभी का मन मोह रही है और अगले दो दिन तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमो के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओ, लोक गीत व संगीत को करीब से जानने का अवसर भी मिलेगा।
वसंतोत्सव के अवसर पर प्रदेशभर से विभिन्न फूलो की प्रजातियों का संग्रह देखने को मिल रहा है तो वही प्रदेश के कई स्थानों से आये लोग अपने स्टॉल के माध्यम से आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण भी बना रहे है।कार्यक्रम की सफलता के लिए कृषि मंत्री, सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा डाक विभाग सहित लगभग तीस विभागों की सहभागिता देखी जा रही है साथ ही सभी के द्वारा उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया है।
राज्यपाल ने लोगों से आह्वान किया कि इन तीन दिनों को उत्सव की तरह मनाएं और प्रकृति के साथ आत्मिक जुड़ाव स्थापित करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराएं हम सभी को नई ऊर्जा देती हैं। उन्होंने इस अवसर को अपनी लगन और पैशन को सही दिशा देने का भी समय बताया। कार्यक्रम की सफलता के लिए उन्होंने कृषि मंत्री, सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा डाक विभाग सहित लगभग तीस विभागों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से उत्तराखंड का संदेश न केवल पूरे भारत बल्कि समूची मानवता तक पहुंच रहा है। अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने प्रदेश पर ईश्वर के आशीर्वाद की कामना करते हुए सभी से इस आयोजन का आनंद लेने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
