मंत्री रेखा आर्य के पति की बिहार की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी,उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमाई।
देहरादून-03 जनवरी 2026
उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है.वजह बना है महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू का एक कथित विवादित बयान.सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साहू बिहार को लेकर महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं.बयान के बाद जहां विपक्ष ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया है, वहीं भाजपा इसे माफी के साथ समाप्त हुआ मामला बता रही है।
भाजपा नेताओं से जुड़े लगातार विवादों के बीच एक बार फिर सत्तारूढ़ दल सवालों के घेरे में है.अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर विधानसभा के स्याहीदेवी मंडल में 23 दिसंबर को आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.इस वीडियो में महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू यह कहते सुने जा सकते हैं कि अगर शादी नहीं हो रही है तो 20–25 हजार रुपये में बिहार से लड़की खरीद लो।
वीडियो सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई.कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस बयान को महिलाओं के सम्मान और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया.मामले ने तूल पकड़ा तो गिरधारी लाल साहू ने सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी.उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान सामान्य बातचीत को राजनीतिक विरोधियों ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया, उन्होंने यह भी कहा कि वे महिलाओं को देवी के समान सम्मान देते हैं और किसी की भावना आहत हुई हो तो वे हाथ जोड़कर क्षमा मांगते हैं।
वही भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया, उनका कहना है कि अगर किसी के शब्दों से किसी की भावना आहत हुई है और उसने माफी मांग ली है, तो इस मुद्दे को तूल देकर किसी की भावनाओं को भड़काना गलत है और कई बार इस तरीके के प्रकरण सामने आते तो स्वयं व्यक्ति अपने आप में पश्चात कर लेता है तो कोई बड़ी बात नहीं है.
जिसके बाद कांग्रेस की प्रवक्ता सुजाता पॉल ने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या महिलाओं को खरीदने-बेचने जैसी मानसिकता को “कोई बड़ी बात नहीं” कहा जा सकता है.उन्होंने इसे संभावित मानव तस्करी से जोड़ते हुए मंत्री के पति से पूछताछ और एफआईआर की मांग की।
मुद्दा सिर्फ एक बयान का नहीं है, बल्कि सोच और संवेदनशीलता का है.एक तरफ भाजपा इसे माफी के साथ खत्म हुआ मामला बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या महिलाओं से जुड़े इतने गंभीर बयान को सिर्फ माफी कहकर टाला जा सकता है? अब देखना होगा कि सरकार इसे राजनीतिक विवाद मानकर छोड़ती है,या कानून और महिला सम्मान के सवाल पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।
