विभागों के तहत छोटे अपराधों में कारावास नहीं अब सिर्फ भुगतना होगा अर्थ दंड।
उत्तराखंड-11 दिसम्बर 2025
विभागों के तहत छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, कानूनों में छोटी तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियों के लिये नागरिक दंड एवं प्रशासनिक कार्यवाही शुरू करने, कानूनों के अप्रचलित एवं अनावश्यक प्रावधानों को हटाये जाने को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। दरअसल, भारत सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देश पर उत्तराखण्ड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025 को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया है। जिसपर बुधवार को हुई धामी मंत्रिमंडल ने मुहर लगा दी है।
नियोजन विभाग ने प्रदेश में कुल 52 अधिनियम चिन्हित किए हैं। जिनमें सजा के प्रावधानों में बदलाव किया जाने हैं। पहले चरण में तमाम विभागों के सात कानूनों में बदलवा किया गया है। जिसके तहत कुछ कानून में जेल की सजा को कम किया गया है तो वहीं, तमाम कानूनों में जेल की सजा को हटा दिया गया है। हालांकि, ये जरूर है कि जुर्माने की राशि में काफी अधिक बढ़ोत्तरी का प्रावधान किया गया है। इस अध्यादेश में प्रावधान किया गया है कि अर्थ दंड की राशि में हर तीन साल में 10 फ़ीसदी की वृद्धि की जाएगी।
जीवन और व्यापार को आसान बनाने के लिए विश्वास आधारित शासन को और अधिक बढ़ाने के लिए अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और तर्कसंगत बनाने के लिए पहले चरण में सात अधिनियमों में संशोधन करने के लिए अध्यादेश लगाया गया है। उत्तराखंड राज्यपाल ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) में प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, अध्यादेश प्रख्यापित कर दिया है। ऐसे में यह अध्यादेश उत्तराखंड राज्य में लागू हो गई है। ऐसे में इस अध्यादेश का पहले के किसी भी मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वही, प्रमुख सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि नियोजन विभाग ने 52 अधिनियम को चिन्हित किया है जिसमें कारागार सजा के प्रावधानों को कम करना या हटाना है। पहले चरण में 7 अधिनियम को उत्तराखण्ड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश में शामिल किया गया है। ऐसे में जिस तरह से अन्य विभागों से बातचीत होगी उसी के आधार पर अन्य अधिनियम को भी इसमें शामिल किया जाएगा। साथ ही कहा कि इसका मकसद यही है कि छोटे अपराधों की सजा अर्थ दंड हो कारावास ना हो।
