कल मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे आदिबद्री मंदिर के कपाट।
गैरसैंण- 13 जनवरी 2026
रिपोर्ट-पुष्कर सिंह रावत
पंचबद्री में प्रथम आदिबद्री धाम के कपाट कल 14 जनवरी बुधवार को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिये जायेंगे.इस अवसर पर आदिबद्री मंदिर को दो कुंतल फूलों से सजाया गया है.बता दें कि आदिबद्री मंदिर के कपाट वर्ष में एक माह पौष माह के लिए बंद रहते हैं और मकर संक्रांति पर भक्तों के लिए पुनः खोल दिए जाते हैं.
आदिबद्री धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद बहुगुणा ने जानकारी देते हुए बताया कि कल सुबह 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में आदिबद्री मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जायेंगे.बताया कि मंदिर को 2 कुंतल फूलों से सजाया गया है.कल ब्रह्म मुहूर्त पर भगवान बद्रीनारायण को स्नान व भोग लगाया जायेगा व मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिये जायेंगे.
20 तारीख तक होगा श्रीमद्भागवत कथा का वाचन⤵️
इस अवसर पर महिला मंगल दलों व स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा संस्कृतिक कार्यकर्मों की प्रस्तुति दी जायेगी व श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा.जगदीश प्रसाद बहुगुणा ने बताया कि कपाट खुलने से लेकर 3 दिनों तक संस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा व 20 तारीख तक श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जायेगा. मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि कपाट खुलने के लगभग तीन से पांच हजार श्रद्धालु साक्षी बनेंगे.
आदिबद्री मंदिर भगवान नारायण को है समर्पित⤵️
आदिबद्री मंदिर भगवान नारायण को समर्पित है, जो भगवान विष्णु के एक अवतार हैं। परिसर के भीतर मुख्य मंदिर में भगवान नारायण की एक पूज्यनीय काले पत्थर की मूर्ति है। आदिबद्री को भगवान विष्णु का सबसे पहला निवास स्थान माना जाता है। बद्रीनाथ से पहले आदिबद्री कि ही पूजा की जाती है। किंवदंतियों से पता चलता है कि भगवान विष्णु कलयुग में बद्रीनाथ जाने से पहले सतयुग, त्रेता और द्वापर युगों के दौरान आदिबद्री में निवास करते थे।मान्यता के अनुसार बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने से पहले आदिबद्री के दर्शन करने जरुरी होते हैं तभी बद्रीनाथ की यात्रा सफल होती है। माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इन मंदिरों के निर्माण का समर्थन किया था, जिसका उद्देश्य पूरे देश में हिंदू धर्म के सिद्धांतों का प्रसार करना था।
आदिबद्री मंदिर 16 मंदिरों का हुआ करता था समूह,अब रह गए 14 मंदिर⤵️
किसी जमाने में आदिबद्री मंदिर 16 मंदिरों का समूह हुआ करता था लेकिन अब यहां सिर्फ 14 मंदिर रह गए हैं। आदिबद्री परिसर में भगवान विष्णु के मुख्य मंदिर के समेत 16 मंदिर मौजूद थे. इनमें से दो काफी पहले खंडित हो गए थे.अब 14 बाकी हैं. इन 14 मंदिरों के बारे में बताया जाता है कि भगवान के सभी गण जैसे कि उनकी सवारी के रूप में गरुड़ भगवान,अन्नपूर्णा देवी, कुबेर भगवान, सत्यनारायण, लक्ष्मी नारायण, गणेश भगवान, हनुमान जी, गौरी शंकर, महिषासुर मर्दिनी, शिवालय, जानकी जी, सूर्य भगवान इत्यादि 14 मंदिर अभी भी आदिबद्री परिसर में मौजूद हैं.
