भालू की दहशत से खाली हुआ पूरा गांव,आखिरी परिवार ने भी छोड़ा घर।
पौड़ी गढ़वाल-21 जनवरी 2026
उत्तराखंड में इस साल भालू की गतिविधियों और हमलों की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बीते सालों की तुलना में जहां भालू के हमले बहुत कम दर्ज होते थे, वहीं इस वर्ष लगातार हो रही घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। इसी डर के कारण बस्तांग गांव से ग्रामीणों ने पलायन कर दिया है। गांव का आखिरी परिवार भी दूसरे गांव में विस्थापित हो गया है।
सर्दियों के इस समय बर्फबारी और ठंड के बीच भालू शीत निंद्रा में रहता है। लेकिन बर्फबारी न होने और पर्याप्त भोजन न मिल पाने के कारण भालू आबादी के बीच पहुंच रहा है। कई घटनाओं में भालू के हमले में इंसानों की जान भी गई है। खासकर जंगलों से सटे गांवों में भालू के हमले तेजी से बढ़ रहे हैं जिससे जन-जीवन प्रभावित हो रहा है। कुछ दिन पहले पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में भालू ने एक महिला पर हमला कर दिया था, जिसमें महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है।इसी दहशत के कारण पोखड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बस्तांग गांव के ग्रामीण अपने पैतृक घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। गांव में मौजूद सिर्फ दो परिवार में से एक परिवार पहले ही कोटद्वार विस्थापित हो गया है. जबकि दूसरे परिवार ने भी गांव खाली कर पास के गांव पणिया में अस्थायी रूप से शरण ले ली है।
पणिया गांव में शरण लेने पर मजबूर हरिप्रसाद का कहना है कि जनवरी महीने में मात्र तीन दिन के भीतर भालू ने उनके छह मवेशियों को मार डाला। जान का खतरा और आजीविका पर संकट देखते हुए उन्हें परिवार समेत गांव छोड़ना पड़ा। अब तक प्रशासन की ओर से न तो कोई सहायता मिली है और न ही कोई अधिकारी उनकी सुध लेने पहुंचा है।परिवार का कहना है कि यह फैसला उन्होंने मजबूरी में लिया है। क्योंकि गांव में रहना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है. भालू दिन के समय भी गांव के आसपास दिखाई दे रहे हैं। जिससे महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक भयभीत हैं। भालू, गांव में उनके मवेशियों को भी निशाना बना रहा है. जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि, भालू की बढ़ती गतिविधियों की जानकारी वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक कई बार पहुंचाई गई। लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। वन विभाग की ओर से न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही भालू को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई. प्रशासन की अनदेखी से आहत होकर अपने घर, खेत और मवेशी छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा है।
अन्य ग्रामीणों का कहना है कि, यदि समय रहते वन विभाग और शासन-प्रशासन द्वारा उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और भी बढ़ सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भालू की गतिविधियों पर तुरंत नियंत्रण किया जाए। प्रभावित परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए और विस्थापित ग्रामीणों के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि वे दोबारा अपने पैतृक गांवों में सुरक्षित लौट सकें।
ग्राम प्रधान, पणिया गांव हर्षपाल सिंह, ने कहा कि उनकी ग्रामसभा में भालू के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। महिलाएं घास और लकड़ी लेने जंगल जाने से डर रही हैं, हर समय जान का खतरा बना हुआ है।
जिला पंचायत सदस्य पोखड़ा बलवंत सिंह नेगी, कहते हैं किउत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही जीवन यापन कठिन है और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने हालात और खराब कर दिए हैं। सरकार से शीघ्र ठोस निर्णय लेने की मांग की, ताकि लोग सुरक्षित रूप से अपने गांवों में रह सके।
डीएफओमहातिम यादव ने कहा कि बस्तांग गांव में मवेशियों की मौत के मामले में मुआवजा प्रक्रिया चल रही है। संबंधित रेंजर से रिपोर्ट मांगी गई है और प्रभावित परिवार को शीघ्र मुआवजा दिया जाएगा। भालू को पकड़ने के लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
