युवक पर लगाया था पिता ने बेटी के साथ यौन शोषण का आरोप,हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए जांच रोकने के आदेश।
नैनीताल-25 फरवरी 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामनगर पुलिस को उस मामले की जांच रोकने का आदेश दिया है,जिसमें एक पिता ने एक युवक पर अपनी बेटी के अपहरण और यौन शोषण का आरोप लगाया था। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता (पति) और पीड़िता दोनों के आधार कार्ड के अनुसार वे वयस्क हैं, इसलिए वर्तमान स्थिति में आगे की जांच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है
क्या था पूरा मामला?⤵️
दरअसल, रामनगर थाने में पीड़िता के पिता ने याचिकाकर्ता सुधांशु रावत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पिता का आरोप था कि याचिकाकर्ता ने उसकी बेटी का अपहरण किया और उसके साथ गलत काम किया,इसके उलट याचिकाकर्ता ने इस एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी।
ओडिशा में शादी कर चुके याचिकाकर्ता और पीड़िता⤵️
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सुधांशु और पीड़िता एक-दूसरे से प्रेम करते थे। उन्होंने 16 अगस्त 2025 को ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित बनदुर्गा मंदिर में विवाह कर लिया था। शादी के बाद उन्होंने एक नोटरीकृत समझौता भी तैयार किया था। उम्र के प्रमाण के रूप में अदालत में पीड़िता का आधार कार्ड पेश किया गया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 अगस्त 2007 अंकित है,जिससे अगस्त 2025 में वो 18 वर्ष की (वयस्क) साबित हुई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुई पीड़िता⤵️
चूंकि पीड़िता वर्तमान में हल्द्वानी स्थित नारी निकेतन में रह रही थी,इसलिए अदालत ने उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया था। नारी निकेतन की अधीक्षिका कंचन आर्या की उपस्थिति में पीड़िता ने न्यायाधीश से बातचीत की। इस दौरान पीड़िता ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उसने अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के साथ विवाह किया है।
पीड़िता ने अपने परिवार और पिता से बताया जान को खतरा⤵️
वहीं, सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पीड़िता को अपने ही परिवार और पिता से जान का खतरा है। नारी निकेतन की अधीक्षिका ने भी कोर्ट को अवगत कराया कि हालांकि पॉक्सो कोर्ट ने पीड़िता को रिहा करने के आदेश दे दिए हैं,लेकिन उसके परिवार की ओर से गंभीर सुरक्षा खतरा बना हुआ है।इसी खतरे को देखते हुए पीड़िता को फिलहाल नारी निकेतन में ही रखा गया था।
हाईकोर्ट ने दिए ये आदेश⤵️
अदालत ने स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता (पति) अभी न्यायिक हिरासत में है, इसलिए पीड़िता को सीधे रिहा करना उसके हित में नहीं होगा। हालांकि, कोर्ट ने एक विकल्प दिया कि यदि याचिकाकर्ता के माता-पिता (पीड़िता के सास-ससुर) उसे अपने घर ले जाने के लिए तैयार हैं और इसके लिए शपथ पत्र दाखिल करते हैं, तो नारी निकेतन के अधिकारी उसे उनके सुपुर्द कर सकते हैं।लड़की के पिता उसे किसी तरह की हानि नहीं पहुंचाएंगे।
