एक माह से आतंक मचा रहा गुलदार पिंजरे की कैद में,क्षेत्र में अन्य गुलदारों की संभावनाओं के चलते आपरेशन जारी रखने की मांग।

एक माह से आतंक मचा रहा गुलदार पिंजरे की कैद में,क्षेत्र में अन्य गुलदारों की संभावनाओं के चलते आपरेशन जारी रखने की मांग।

माहभर में 9 घटनाओं में 17 गायें बनी निवाला,हरिद्वार के चिड़ियापुर भेजा जाएगा गुलदार।

मेहलचोरी (गैरसैंण)-26 जनवरी 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला

विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत मेहलचोरी क्षेत्र में एक माह से आतंक का पर्याय बने गौभक्षी गुलदार के पिंजरे में कैद होने से जहां ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, वहीं एक माह से रात दिन गश्त कर रहे वन विभाग के कर्मचारी भी थोड़ा सकून महसूस कर रहे हैं।

सोमवार को कुनीगाड क्षेत्र के खजूरखाल में लगाए गये पिंजरे में जैसे ही गुलदार के कैद होने की सूचना ग्रामीणों द्वारा वन विभाग के अधिकारीयों को दी गयी तो ,पूरी टीम मौके पर पहुंच गयी ।वन क्षेत्राधिकार लोहवा रेंज प्रदीप गौड़ ने बताया कि मादा गुलदार की उम्र 5 वर्ष के लगभग है ,जो पूर्णतया स्वस्थ नजर आ रही है। फिलहाल मादा गुलदार का कोई बच्चा ना होना भी एक राहत भरी खबर है, जिसे अब चिड़ियापुर हरिद्वार के संरक्षित क्षेत्र में भेजा जाएगा।

उल्लेखनीय है की पिछले एक माह से मेहलचौरी न्याय पंचायत अलग-अलग गांवों में गुलदारों के कुल 9 हमलों में 17 गोवंश को अपनी जान गंवानी पड़ी थी,जिससे ग्रामीणों में लगातार भय का वातावरण बना हुआ था.जिसके चलते एक तरफ ग्रामीणों
को बच्चों सहित मवेशियों को लेकर चिंता बनी हुई थी,वहीं वन विभाग भी कम परेशान नहीं था अक्सर हो रही गुलदार के हमलों के बाद सूचनाओं के आधार पर वन विभाग की टीम गांव में जाकर मौका मुआयना करती है साथ ही मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम कर और दफनाने का जिम्मा भी होता है। साथ ही पशुपालकों को देय मुआवजे के कागजात भी तैयार करने होते हैं। वहीं प्रभावित क्षेत्र में गुलदार के हमले से लोगों को बचाने के लिए जरूरी उपाय बताने की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है। इसी कड़ी में शाम के वक्त प्रभावित क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी की निशान ढूंढना ओर पिंजरा लगाने की चुनौती होती है,जबकि गुलदार की सक्रियता के संभावित गांवों में रात्री गश्त लगाने के साथ ही गुलदार को बस्तियों से दूर रखने के लिए रात-भर पटाखे फोड़ने का काम भी किया जाता है। फिलहाल एक गुलदार के पकड़े जाने से जहां ग्रामीणों में भय तो कम काम हुआ है, लेकिन क्षेत्र में सक्रिय अन्य गुलदारों की संभावनाओं को देखते हुए ऑपरेशन को जारी रखने की मांग भी की जा रही है।

वन क्षेत्राधिकार लोहवा रेंज गैरसैंण प्रदीप गौड़ ने बताया कि पकड़ी गयी मादा गुलदार एकदम स्वस्थ है ,5 वर्ष की उम्र के हिसाब से वजन को देखकर लग रहा है की अधिकांश गायों को इसके द्वारा ही निवाला बनाया गया होगा.फिलहाल गुलदार के बच्चे नहीं हैं,जिसके चलते उसे अब चिड़ियाघर हरिद्वार भेजा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!