हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक (प्राइमरी) भर्ती काउंसिलिंग में छूट गए अभ्यर्थियों के लिये सीट रिक्त रखने के दिए आदेश।
नैनीताल-30 जनवरी 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक (प्राइमरी) भर्ती प्रक्रिया के लिये हुई काउंसिलिंग में कई अभ्यर्थियों के कम समय के कारण शामिल न हो पाने और उनके स्थान पर कम मैरिट वाले अभ्यर्थियों का चयन होने के सम्बन्ध में दायर याचिकाओं की सुनवाई की।इस मामले में अवकाश कालीन जज न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने स्पष्ट किया है कि चयन का मुख्य आधार ‘मेरिट’ होना चाहिए। काउंसिलिंग में छूट गए अभ्यर्थियों के लिये सीट रिक्त रखी जाए।इस आदेश के बाद अब उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो अधिक अंक होने के बावजूद केवल प्रशासनिक अव्यवस्था और समय की कमी के कारण काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रभावित अभ्यर्थियों के हक की रक्षा की जाए।
मामले के अनुसार 12 जनवरी को काउंसलिंग प्रक्रिया विभिन्न जिलों में एक ही दिन रख दी गई। इसकी सूचना भी महज 24 घंटे पहले दी गई, इस कम समय के कारण अभ्यर्थी अपने पसंदीदा जिलों में नहीं पहुंच सके। स्थिति तब और जटिल हो गई जब काउंसलिंग करा रहे अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज शाम 4 बजे तक जमा रखे गए। जिससे उनके पास दूसरे जिले में जाने का कोई विकल्प नहीं बचा।
कोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में स्थापित नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार काउंसलिंग से पहले ‘फाइनल मेरिट लिस्ट’ और ‘पात्रता सूची’ सार्वजनिक की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय, विभाग ने प्रारंभिक सूची के आधार पर ही सभी आवेदकों को बुला लिया, जिससे भारी अव्यवस्था फैली और मेधावी छात्र मेरिट में ऊपर होने के बावजूद चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। अभ्यर्थियों का मुख्य तर्क यह है कि उनसे कम ‘अंक’ वाले लोगों को नियुक्त किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर मेरिट प्रणाली का उल्लंघन है।याचिकाकर्ताओं ने कहा सिर्फ समय की बाध्यता और सूचना के अभाव में उन्हें उनके संवैधानिक हक से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से इस पूरी प्रक्रिया पर जवाब तलब किया है।
अदालत ने अभ्यर्थियों के हित में निर्देश दिया है कि जिन जिलों में याचिकाकर्ताओं ने मेरिट में होने के बावजूद उपस्थित न हो पाने की विवशता जताई है, वहां उनके लिए सीटें आरक्षित रखी जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मामले का पूर्ण निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक उन सीटों को भरा न जाए।
