संतोषजनक कार्य न होने पर अतिथि शिक्षक सेवा विस्तार का दावा नहीं कर सकते’ कहकर हाइकोर्ट ने खारिज की याचिका।
नैनीताल-25 मार्च 2026
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के हिंदी विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत प्रिया जोशी की याचिका को योग्यता की कमी के आधार पर नैनीताल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि संतोषजनक कार्य न होने की स्थिति में अतिथि शिक्षक सेवा विस्तार का दावा नहीं कर सकते। इस आधार पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया
दरअसल, हिंदी विभाग में अतिथि शिक्षक प्रिया जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में मांग की थी कि विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर (हिंदी) के पद पर नियमित चयन होने तक उनकी सेवाओं को अतिथि व्याख्याता के रूप में विस्तारित किया जाए। मामले के तथ्यों के मुताबिक, याचिकाकर्ता को 5 मार्च 2024 के विज्ञापन के आधार पर अस्थायी रूप से अतिथि संकाय के रूप में नियुक्ति दी गई थी।
उनकी नियुक्ति की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि यह व्यवस्था पूरी तरह से अस्थायी है,जो केवल 31 दिसंबर 2024 या नियमित नियुक्ति होने तक, जो भी पहले हो, तब तक प्रभावी रहेगी। वहीं, दिसंबर 2024 के बाद विवि ने उनकी सेवाओं को जून 2025 तक 6 महीने के लिए विस्तार दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि इस विस्तारित अवधि के दौरान याचिकाकर्ता यानी प्रिया जोशी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, वो 96 दिनों तक अनुपस्थित रहीं।
वहीं, एसएसजे विश्वविद्यालय ने इस अनियमितता को लेकर 21 अप्रैल 2025 को प्रिया जोशी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिसका याचिकाकर्ता की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी कारणवश विवि प्रशासन ने जून 2025 के बाद उनकी सेवाओं को और आगे न बढ़ाने का फैसला लिया, जिसे प्रिया जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी। वहीं, अब हाईकोर्ट ने संतोषजनक कार्य न होने की स्थिति में कोई अतिथि शिक्षक सेवा विस्तार का दावा नहीं कर सकता, यह कहकर याचिका खारिज कर दी है।
