जोशीमठ भू- धंसाव के रहस्य से जल्द उठेगा पर्दा,लैंडस्लाइड के मलबे पर नहीं बल्कि ग्लेशियर के मलबे पर बसा है जोशीमठ शहर।

जोशीमठ भू- धंसाव के रहस्य से जल्द उठेगा पर्दा,लैंडस्लाइड के मलबे पर नहीं बल्कि ग्लेशियर के मलबे पर बसा है जोशीमठ शहर।

देहरादून-01 जनवरी 2025

जोशीमठ में लगातार हो रहे भू- धंसाव को लेकर वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि, जोशीमठ में पिछले कुछ सालों से नहीं बल्कि दो से तीन दशकों से भू- धंसाव की संभावना जताई जा रही है। लेकिन साल 2022-23 के दौरान भू धंसाव की स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। इसके बाद वाडिया के साथ ही अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिकों की ओर से उस क्षेत्र में अध्ययन किया गया। जिसमें पाया गया कि धंसाव अलग-अलग जगह पर कुछ सेंटीमीटर से लेकर 14.5 मीटर तक है। इसके साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि जोशीमठ शहर पुराने भूस्खलन के मलबे के ऊपर बस है जिस वजह से जमीन लगातार धंस रही है। तो वही, वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक जोशीमठ पर अध्ययन कर रहे हैं इसके शुरुआती चरण में यह बात सामने आई है कि जोशीमठ क्षेत्र भूस्खलन के मलबे पर नहीं बल्कि ग्लेशियर के छोटे मालवे के ढेर पर बसा है।

वही, वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनीष मेहता ने कहा कि जोशीमठ की स्टडी चल रही है। शुरुआती अध्ययन में  गोरसों और आली क्षेत्र में ग्लेशियर के एडवांस मेल्ट और मोरनी डेट मिली है। जिसकी डेटिंग के दौरान यह पता चला कि वहां पर ग्लेशियर के पीछे खींचने के बाद जो मालवा छूट गया वह करीब 7 हज़ार साल पुराना है। यानी 7000 साल पहले यह पूरा क्षेत्र ग्लेशियर से ढका हुआ था। ऐसे में फिलहाल शुरुआती अध्ययन से ये अनुमान लगाया जा रहा है कि जोशीमठ शहर भूस्खलन के मलवे पर नहीं बल्कि ग्लेशियर के मलवे पर बसा हुआ है। साथ ही कहा की जोशीमठ क्षेत्र को वर्तमान समय में देखा जाए तो उसकी सतह पर बड़े-बड़े बोल्डर नजर आते हैं। जो भूस्खलन में नहीं होती है बल्कि किसी क्षेत्र में इस तरह के बोल्डर तभी मिलते हैं जब ग्लेशियर अपने साथ लेकर के आता है। इसके अलावा विष्णु प्रयाग के पास कुछ लेक सेडिमेंट्स भी देखे गए हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जब 7000 साल पहले इस क्षेत्र में ग्लेशियर एडवांस हुआ होगा उस दौरान यहां पर मौजूद रिवर को ब्लॉक किया होगा जिससे लेक बनी होगी। ऐसे में जब लेक का सैंपल लेकर उसकी डेटिंग की गई तो उसकी उम्र 4 से 5000 साल निकाल कर सामने आई है। ऐसे में फील्ड वर्क होने के बाद पूरी जानकारी सामने आ पाएगी कि उसे क्षेत्र की एक्चुअल स्थिति पहले क्या थी।

साथ ही कहा कि डेटिंग से 7000 साल पुरानी जानकारियां मिली है ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उस दौरान वहां कोई बसावट नहीं रही होगी। और अगर उसे दौरान कोई बसावट रही भी होगी तो उस रास्ते से लोग बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने जाते रहे होंगे। साथ ही बताया कि करीब 7000 साल पहले यह पूरा क्षेत्र ग्लेशियर से ढका था। ऐसे में ग्लेशियर के पीछे खासकने के बाद जो मालवा छूट गया उसमें भारी मात्रा में बड़े- बड़े बोल्डर भी थे। समय के मलवे ने ठोस धरातल का रूप ले लिया, और फिर इस क्षेत्र में बसावट होने लगी। यही वजह है कि जोशीमठ का क्षेत्र अन्य जमीनों की तुलना में कमजोर है जिसके चलते ही भू- धंसाव हो रहे हैं।

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