मेहलचौरी बाजार में नहीं सुलभ शौचालय की व्यवस्था,सरकारी संस्थान भी बिना शौचालयों के हो रहे संचालित।
स्वच्छता अभियान शून्य रामगंगा नदी के किनारे बिखरे कुडे के ढेर,बाजार में लगी कुछ स्ट्रीट लाईटें खराब तो कुछ गायब
मेहलचौरी (गैरसैंण )-23 फरवरी 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला
गढ़वाल-कुमाऊं के सीमांत ओर गैरसैंण विकासखंड का दूसरा सबसे बड़ा बाजार मेहलचोरी आज भी मूलभूत समस्याओं के लिए जूझने को मजबूर है । यहां से गुजरने वाले राजमार्ग की दुर्दशा सहित आमजन के लिए सुलभ शौचालय की कमी ओर कुडा निस्तारण की व्यवस्था न होना, बाजार क्षेत्र में स्ट्टीट लाईटों की कमी सरकार की तमाम योजनाओं पर तो प्रश्नचिंह खडा कर ही रही है । वहीं मूलभूत समस्याओं का समाधान न होना क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये का भी एक ज्वंलत उदाहरण बनकर रह गया है।
एक तरफ जहां यहां से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 109 ज्योलीकोट-नैनीताल-कर्णप्रयाग अपनी घोषणा के 20 वर्ष बाद भी चौड़ीकरण की बाट जोह रहा है , जिससे आए दिन का जाम ओर जानलेवा दुर्घटनाएं देखने को मिल रही हैं ,वहीं गैरसैंण विकासखंड के एकमात्र होलसेल व रिटेल का सबसे बड़ा बाजार होने के बावजूद यहां एक अदत सुलभ शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। लगभग डेढ़ किलोमीटर के बाजार क्षेत्र में कुछ छोटे शौचालय तो बने हैं,लेकिन सफाई के लिए पानी की व्यवस्था न होने से इनमें पसरी गंदगी के कारण इनका उपयोग भी ना के बराबर ही होता है तो कहीं ताले लगे हुए हैं। जबकि बाजार स्थित पोस्ट ऑफिस व बैंक शाखा में भी आमजन के लिए शौचालय की कोई सुविधा नहीं है,वहीं सरकारी संस्थानों में शामिल पशुपालन व कई अन्य विभाग भी स्वच्छता अभियान के नियमों के विपरीत बिना शौचालय सुविधा के ही संचालित हो रहे हैं।
मेहलचोरी बाजार में व्यापारियों की संख्या लगभग तीन सौ को पार कर चुकी है,वहीं बाजार क्षेत्र में निवास करने वाली आबादी की संख्या लगभग एक हजार पहुंच चुकी है । बाजार में प्रतिदिन कुनीगाड,रोहिडा,माईथान,गैरसैंण सहित पौडी व अल्मोडा जनपदों के सीमांत क्षेत्रों से लगभग 1 हजार से ज्यादा लोगों का आना-जाना होता है। लेकिन शौचालय की सुविधा न होने से आमजन को जरूरत पड़ने पर नजदीकी गधेरों का रुख करना पड़ता है। चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए राजमार्ग 109 उत्तराखंड का केन्द्रिय मार्ग होने के चलते भी सीजन में वाहनों की भारी संख्या यहां से गुजरती है, लेकीन शौचालय जैसी जरूरी सुविधा न होने से कई बार व्यापारीयों द्वारा परेशान यात्रीयों को अपने निजी शौचालय इस्तेमाल को देने पडते हैं। बढ़ती आबादी के बीच घरों से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए कोई भी व्यवस्था न होने से अधिकांश कूड़ा रामगंगा नदी के तटों पर ही बिखरा पड़ा रहता है ,जिससे नदी का पानी तो दूषित हो ही रहा है ,दूसरी तरफ कूड़े के ढेर बंदरों सहित अन्य जंगली जानवरों के भी अड्डे बने हुए हैं । बाजार क्षेत्र में कुछ स्ट्रीट लाईटें पूर्व में लगायी गयी थी ,जिनमें से अधिकांश खराब पड़ी हैं ,जबकि कहीं पोल सहित लाईटें तो कहीं बैटरियां गायब कर दी गयी हैं, जिनको लेकर संबधित ग्राम्य विकास विभाग कोई सुध नहीं ले रहा है।
शौचालयों की समस्या को लेकर जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने कहा की सरकारी संस्थानों में आवश्यक रूप से शौचालय सुविधा देने के लिए जिलाधिकारी चमोली से निर्देशित करने का आग्रह किया गया है।जबकि बाजार क्षेत्र में सुलभ शौचालय सहित छोटे शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है।
