उत्तराखंड-उपनल कर्मियों को मिलेगा समान कार्य का समान वेतन,आदेश जारी।
देहरादून-03 फरवरी 2026
लंबे इंतजार और लगातार आंदोलन के बाद आखिरकार उत्तराखंड सरकार ने उपनल (UPNL) कर्मियों के लिए समान कार्य–समान वेतन का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो वर्षों से वेतन विसंगतियों को लेकर संघर्ष कर रहे थे। सरकार द्वारा पहले दिए गए आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन और हड़ताल स्थगित कर दी थी, और अब अप्रैल माह से वेतन निर्धारण से जुड़े आदेश लागू कर दिए गए हैं।
सरकार ने यह निर्णय न्यायालय के आदेशों के क्रम में लिया है। शासन स्तर पर इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे अब उपनल कर्मियों को उनके कार्य और कौशल के अनुसार वेतन मिलेगा। इससे पहले कर्मचारियों को समान कार्य के बावजूद अलग-अलग वेतन मिल रहा था, जिसे लेकर लगातार असंतोष बना हुआ था।
सैनिक कल्याण सचिव ने जारी किया शासनादेश⤵️
सचिव सैनिक कल्याण दीपेन्द्र चौधरी की ओर से उत्तराखंड शासन का यह आदेश जारी किया गया है। आदेश में 12 नवंबर 2018 को कट-ऑफ डेट निर्धारित किया गया है, जिसके आधार पर उपनल कर्मियों के वेतन का निर्धारण किया जाएगा।
श्रेणीवार तय किया गया वेतन स्तर⤵️
शासनादेश के अनुसार उपनल कर्मियों के लिए वेतन स्तर इस प्रकार तय किए गए हैं—
अकुशल श्रमिक: लेवल–1
अर्धकुशल श्रमिक: लेवल–2
कुशल कर्मी: लेवल–4
उच्च कुशल कर्मी: लेवल–7
अधिकारी वर्ग: लेवल–10 की बेसिक सैलरी
इन वेतन स्तरों के अनुसार अब उपनल कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर वेतन का लाभ मिलेगा।
कर्मचारी महासंघ ने जताया सरकार का आभार⤵️
उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने सरकार के इस फैसले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। साथ ही उन्होंने सभी कैबिनेट मंत्रियों और वेतन निर्धारण के लिए गठित समितियों के सदस्यों का भी धन्यवाद किया।
उपनल कर्मचारियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला⤵️
विनोद गोदियाल ने कहा कि आज उत्तराखंड सरकार ने उपनल कर्मचारियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह निर्णय कर्मचारियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है और इससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि पूरा उपनल कर्मचारी महासंघ इस फैसले के लिए सरकार का आभारी है।
कर्मचारियों में खुशी की लहर⤵️
समान कार्य–समान वेतन के आदेश के बाद उपनल कर्मियों में खुशी और संतोष का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि इस फैसले से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वर्षों से चली आ रही असमानता भी खत्म होगी। कुल मिलाकर, यह निर्णय उत्तराखंड में संविदा और उपनल कर्मियों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।
