उत्तरकाशी सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में फिर गिरा मलबा,निर्माण कंपनी ने कहा- स्थिति नियंत्रण में।
उत्तराकाशी:-24 अगस्त 2026
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में एक बार फिर मलबा गिरने की घटना सामने आई है। सोमवार को पोलगांव-बड़कोट की ओर से सुरंग के भीतर करीब 1.3 किलोमीटर दूरी पर मलबा गिरने की जानकारी सामने आने के बाद निर्माण कार्य और सुरंग की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें सुरंग के अंदर मलबा जमा दिखाई दे रहा है। हालांकि, निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड ने फिलहाल किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीराम के मुताबिक, सुरंग के भीतर कुछ हिस्सा मलबे से प्रभावित हुआ है और उसे हटाने का काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान इस तरह की भूगर्भीय चुनौतियां सामने आती रहती हैं और मौजूदा स्थिति चिंताजनक नहीं है।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग चारधाम सड़क परियोजना के तहत यमुनोत्री हाईवे पर बनाई जा रही है। करीब 4.5 किलोमीटर लंबी यह सुरंग उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसका निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था और शुरुआती लक्ष्य के मुताबिक इसे 2022 तक पूरा किया जाना था। तकनीकी और निर्माण संबंधी चुनौतियों के कारण परियोजना में देरी हुई। बताया जा रहा है कि सुरंग का बड़ा हिस्सा अब तैयार हो चुका है और सिविल निर्माण का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है। परियोजना को अब मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिलक्यारा सुरंग का नाम नवंबर 2023 के उस बड़े हादसे के बाद देशभर में चर्चा में आया था, जब सुरंग के सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर मलबा गिरने के कारण 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। अचानक रास्ता बंद होने के बाद बचाव एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजदूरों तक सुरक्षित पहुंच बनाना थी। लगभग 17 दिनों तक चले इस जटिल बचाव अभियान के दौरान कई स्तरों पर प्रयास किए गए। लगातार बदलती परिस्थितियों और सुरंग की कठिन भूगर्भीय संरचना के बीच बचाव दलों ने वैकल्पिक तकनीकों का सहारा लिया और अंततः सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
2023 के रेस्क्यू ऑपरेशन में शुरुआती दौर में पाइप के जरिए सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों तक ऑक्सीजन पहुंचाई गई। बाद में इसी माध्यम से भोजन, पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाई गईं। श्रमिकों से संपर्क स्थापित होने के बाद बचाव दलों को उनकी स्थिति की लगातार जानकारी मिलती रही। अंदर फंसे श्रमिकों का मनोबल बनाए रखना भी अभियान का अहम हिस्सा था। कैमरों के जरिए उनकी स्थिति पर नजर रखी गई और उनसे नियमित संवाद किया गया। बाहर उनके परिजनों को भी प्रशासन की ओर से लगातार जानकारी दी जाती रही।
बचाव अभियान में प्रशासन के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियां शामिल थीं। सुरंग के भीतर पहुंच बनाने के लिए ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन मलबे के बीच मौजूद धातु और अन्य बाधाओं के कारण कई बार काम प्रभावित हुआ। एक रास्ते में परेशानी आने पर वैकल्पिक रणनीतियों पर काम किया गया। क्षैतिज ड्रिलिंग के साथ दूसरे विकल्पों पर भी तैयारी रखी गई, ताकि किसी एक तकनीक पर पूरा अभियान निर्भर न रहे।
अब सुरंग के अंदर दोबारा मलबा गिरने की घटना ने निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पहाड़ी भूगर्भीय परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल कंपनी की ओर से इसे सामान्य निर्माण प्रक्रिया के दौरान आने वाली चुनौती बताया गया है और मलबा हटाने का काम जारी है। सिलक्यारा सुरंग का पिछला अनुभव देखते हुए इस तरह की हर घटना पर निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि मलबे की स्थिति को नियंत्रित करते हुए निर्माण कार्य को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जाए और सुरंग के भीतर काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
