चमोली के दो शिक्षकों सुमन ध्यानी शर्मा व लखपत रावत को मिलेगा शैलेश मटियानी पुरस्कार।
गोपेश्वर (चमोली):-31 अगस्त 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.
चमोली जिले की जीजीआईसी गौचर की शिक्षिका डाॅ. सुमन ध्यानी शर्मा तथा राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल चोपता के शिक्षक लखपत सिंह रावत का शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। दोनों को यह पुरस्कार शिक्षक दिवस पर 5 सितबंर को मिलेगा।
बताते चले कि शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण, नवाचार और उल्लेखनीय योगदान से अलग पहचान बनाने वाली राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गौचर की शिक्षिका डाॅ. सुमन ध्यानी शर्मा के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। उन्हें शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा।
डाॅ. सुमन ध्यानी शर्मा की शैक्षिक एवं सामाजिक उपलब्धियों की फेहरिस्त काफी लंबी है। उन्होंने एमए, एमएड और पीएचडी की उपाधियां प्राप्त करने के साथ नेट भी उत्तीर्ण किया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों को इससे पहले भी विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मान मिल चुका है। वह गवर्नर्स अवार्ड-2016, अखिल भारतीय शैक्षिक विमर्श शिक्षक सम्मान-2019, स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय युवा रत्न पुरस्कार-2020, शिक्षा शिरोमणि श्रेष्ठता पुरस्कार-2020 तथा उत्तराखंड गौरव रत्न सम्मान-2023 से सम्मानित हो चुकी हैं। वर्ष 2020 में गोल्डल बुक आॅफ अर्थ द्वारा उन्हें दे मोस्ट इंस्पाइरिंग पीपुल आॅन अर्थ के लिए प्रमाण-पत्र हासिल हुआ। विभिन्न संस्थाओं की ओर से अनेक अन्य सम्मान भी उन्हें प्राप्त हुए हैं। एनएसएस की कार्यक्रम अधिकारी के रूप में सामाजिक तथा रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने में उनका कोई सानी नहीं रहा। शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अप्रतिम योगदान के लिए हालांकि उन्हें यह सम्मान पहले ही मिल जाना चाहिए था किन्तु देर से ही उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना तो गया।
नारायणबगड़ ब्लाॅक के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक लखपत सिंह रावत का भी छात्र-छात्राओं की बेहतर शिक्षा के लिए समर्पण किसी से छिपा नहीं है। इसके चलते ही उन्हें प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।छात्र-छात्राओं में ज्ञान की अलख जलाए रखने के लिए वह छुट्टियों की भी परवाह नहीं करते है। अपने गांव तुनेड़ा के पंचायत भवन को क्लास में तब्दील कर बच्चों के लिए उन्होंने समर कैम्प की शुरूआत भी की। गर्मियों की छुट्टियों में उन्होंने बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी प्रोत्साहित किया। शिक्षक लखपत सिंह रावत के द्वारा संचालित इस पाठशाला में न केवल उनके विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया अपितु आस-पास के स्कूली बच्चों ने भी पठन-पाठन किया। करीब 20 सालों से हर ग्रीष्मावकाश के दौरान घर या पंचायत भवन में वे निशुल्क कक्षाए संचालित करते आ रहे हैं। इसके चलते ही उनके पढ़ाए कई छात्र राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, हिम ज्योति फाउंडेशन जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में चयनित हुए है। यही नहीं डाॅ. शिवानंद नौटियाल छात्रवृति, श्रीदेव सुमन छात्रवृति तथा मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृति जैसी परीक्षाओं में भी बच्चों ने सफलता पाई है। समर कैम्प में बच्चों को चित्रकला, कविता लेखन, लोकगीत, भाषण कला, सामान्य ज्ञान तथा विज्ञान के बेसिक प्रयोगों की भी जानकारी छात्र-छात्राओं को देने का बीड़ा उन्होंने उठाए रखा। यही वजह है कि आम अभिवावकों और बच्चों में वे काफी लोकप्रिय भी हैं। इसके चलते ही उन्हें प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार हासिल होने जा रहा है।
