पौड़ी में दर्दनाक हादसा:खाई में गिरी कार,SBI पाबौ शाखा प्रबंधक की मौके पर मौत।
पौड़ी गढ़वाल:-06 सितंबर 2026
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है जहां मांडाखाल में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में एसबीआई पाबौ शाखा के प्रबंधक संजीव किलानिया की मौत हो गई। बुआखाल-रामनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनकी कार अचानक अनियंत्रित होकर करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना गंभीर था कि संजीव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की खबर सामने आने के बाद पौड़ी और पाबौ में शोक का माहौल है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों और स्वजनों में भी हादसे को लेकर गहरा दुख है।
कोतवाली पौड़ी के प्रभारी निरीक्षक जयपाल नेगी के अनुसार, संजीव किलानिया शनिवार रात करीब नौ बजे पाबौ स्थित बैंक शाखा में ड्यूटी पूरी करने के बाद कार से पौड़ी मुख्यालय के लिए निकले थे। मांडाखाल के पास पहुंचते ही उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे खाई में जा गिरी। देर रात तक जब संजीव अपने घर नहीं पहुंचे तो परिवार की ओर से उनकी तलाश शुरू की गई। निकट पेट्रोल पंप क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि संजीव रात करीब नौ बजे कार्यालय से निकले थे, लेकिन अभी तक घर नहीं पहुंचे हैं। सूचना मिलते ही कोतवाली पौड़ी पुलिस, फायर यूनिट पौड़ी और पाबौ पुलिस की टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास सर्च अभियान शुरू किया।
तलाशी के दौरान मांडाखाल के समीप दुर्घटना के संकेत मिले। इसके बाद टीम ने खाई में उतरकर रेस्क्यू अभियान चलाया। करीब 150 मीटर नीचे संजीव किलानिया को बरामद किया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल पौड़ी भेजा, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव स्वजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस के अनुसार संजीव किलानिया मूल रूप से 856 पी, सेक्टर-10, गुरुग्राम, हरियाणा के निवासी थे। वह मई 2026 से पाबौ में एसबीआई शाखा प्रबंधक के पद पर सेवाएं दे रहे थे। पौड़ी में उनका परिवार कोटद्वार रोड पर पेट्रोल पंप के समीप रहता था। एसबीआई पौड़ी के मुख्य शाखा प्रबंधक तरुण जोशी ने बताया कि संजीव मूल रूप से हरियाणा के हिसार के रहने वाले थे और उनका परिवार वर्तमान में गुरुग्राम में रहता था। पौड़ी में संजीव अपनी पत्नी और बेटे के साथ रह रहे थे।संजीव की अचानक हुई मौत से बैंक कर्मचारियों और परिचितों में शोक की लहर है। परिवार के लिए भी यह हादसा एक ऐसे दुख के रूप में सामने आया है, जिसकी खबर देर रात तक घर न लौटने की चिंता से शुरू हुई और सुबह तक मातम में बदल गई।
