मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर शहीदों को नमन,शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में परिजनों ने दी श्रद्धांजलि।
सीएम धामी ने वर्चुअल माध्यम से किया नमन,मंत्री गणेश जोशी ने गिनाईं विकास योजनाएं।
विकास के दावों पर विपक्ष ने उठाए सवाल।
मसूरी (देहरादून):-02 सितंबर 2026
मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर बुधवार को शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में आंदोलन के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। शहीदों के परिजनों ने उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मसूरी नहीं पहुंच सके। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य आंदोलन के शहीदों और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पहाड़ के लोगों को रोजगार और विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए छोटे उद्योगों, होमस्टे समेत विभिन्न योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण और सरकारी सेवाओं में आरक्षण का लाभ भी दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार मसूरी के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रस्तावित भिलाडू स्टेडियम के निर्माण में वन विभाग की एनओसी बड़ी बाधा बनी हुई थी, लेकिन अब अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल गया है। जल्द ही स्टेडियम का निर्माण शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गढ़वाल सभा के भवन के निर्माण को लेकर भी प्रयास जारी हैं और जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।
वहीं, कार्यक्रम में मौजूद राज्य आंदोलनकारियों और विपक्षी नेताओं ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है,जबकि धरातल पर स्थिति अलग है। आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी शहीदों और आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है। उन्होंने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को शहीदों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके सपनों को धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मसूरी में हो रहे निर्माण और विकास कार्यों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण और पहाड़ को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
