उड़ीसा के तर्ज पर चारधाम मार्गों पर बनेंगे शेल्टर,यात्रियों के साथ आम जनता भी कर सकेगी इस्तेमाल!
उत्तराखंड- 01 जनवरी 2026
उत्तराखंड चारधाम यात्रा मार्गों पर इमरजेंसी के दौरान श्रद्धालुओं को शेल्टर की व्यवस्था भी मिलेगी। दरअसल, चारधाम यात्रा के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन के चलते कई बार सड़क मार्ग बाधित हो जाते हैं। जिसके चलते यात्रियों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्रियों को लंबे समय तक रास्ता खोलने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग चारधाम यात्रा मार्गों पर 10 शेल्टर बनाने का निर्णय लिया है जिसकी प्रक्रिया भी विभागीय स्तर पर शुरू हो गई है। आखिर क्या है ये योजना, देश के तमाम हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को क्या होगा फायदा?
उत्तराखंड राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते आपदा जैसे हालात बनते रहते हैं खासकर मानसून सीजन के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में स्थितियां काफी अधिक गंभीर हो जाती है, और इस दौरान भी उत्तराखंड चारधाम की यात्रा संचालित होती है। हालांकि, हर साल अप्रैल- मई महीने से उत्तराखंड चारधाम यात्रा का आगाज हो जाता है जो नवंबर महीने तक चलती है। ऐसे में मानसून सीजन के अलावा भी कई बार पर्वतीय मार्गों पर भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जिस दौरान सड़के बाधित या फिर सड़क क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जिसे श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ताहै। ऐसा ही कुछ मानसून सीजन के दौरान भी देखने को मिलता है क्योंकि इस दौरान भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से आए दिन सड़क मार्ग की सूचनाओं मिलती है। जिसके चलते श्रद्धालु जाम में फंस जाते हैं और उसे दौरान उनके खाने-पीने और ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होती है। जिसको देखते हुए ही अब आपदा प्रबंधन विभाग उड़ीसा की तर्ज पर उत्तराखंड राज्य में शेल्टर बनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, उड़ीसा में डिजास्टर शेल्टर बनाए है,जिससे स्थानीय लोगों को काफी लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि उत्तराखंड सरकार उड़ीसा के डिजास्टर शेल्टर को मॉडल के रूप में लेते हुए और अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों पर 10 शेल्टर बनाने का निर्णय लिया है। खास बात ये होगी कि ये सभी शेल्टर सिर्फ चारधाम यात्रा के लिए डेडीकेटेड नहीं होंगे, बल्कि किसी भी आपात परिस्थितियों यानी आपदा के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही आम जनता भी मल्टीपरपज हॉल के रूप में इसका इस्तेमाल कर सके, उसको ध्यान में रखते हुए शेल्टर को विकसित किया जाएगा।
वही, ज्यादा जानकारी देते हुए आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के जरिए आपदा प्रबंधन विभाग, चारधाम यात्रा मार्ग पर करीब 10 शेल्टर बनाए जाने का निर्णय लिया है। जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही कार्यकारी संस्था का चयन भी कर लिया गया है। ऐसे में चिन्हित कार्यकारी संस्था की ओर से शेल्टर बनाने के लिए डीपीआर तैयार किया जाएगा। चारधाम यात्रा मार्गों पर शेल्टर बनाए जाने को लेकर संबंधित जिलों के साथ बैठके भी की जा चुकी हैं। ऐसे में जिलों की ओर से जिन-जिन जगहों पर जमीन के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं उन जगहों को देखा जाएगा वो जगह भूगर्भीय दृष्टिगत जमीन कितनी उपयुक्त है। इसके साथ ही तमाम अन्य पैरामीटर को देखने के बाद शेल्टर बनाने की जगह को फाइनल किया जाएगा। क्योंकि शेल्टर के लिए जिलों से जो जमीनों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं इन जमीनों पर कार्यकारी संस्था जाकर तमाम पैरामीटर पर जांच करेगी। इसके बाद शेल्टर बनाने के लिए जमीन को फाइनल किया जाएगा, फिर डीपीआर तैयार की जाएंगे। साथ ही सचिव ने बताया कि शेल्टर बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के जरिए 39 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जिनसे ये शेल्टर बनाए जाएंगे। फिलहाल ये शेल्टर करीब 400 लोगों के ठहरने के लिए बनाया जाएगा। शेल्टर को कैसे चलाया जाए उसकी भी एक नियमावली तैयार की जाएगी। ताकि इस शेल्टर का इस्तेमाल पूरे साल भर होता रहे और आसपास के लोगों को जरूरत पड़ने पर भी इसका इस्तेमाल कर सकें।
साथ ही बताया कि डिजास्टर शेल्टर के रूप में बेहतर काम उड़ीसा राज्य में हुआ है। ऐसे में उड़ीसा राज्य को मॉडल के रूप में लेते हुए और राज्य की आवश्यकताओं के आधार पर शेल्टर तैयार किया जाएगा। उत्तराखंड राज्य में चारधाम यात्रा अगर बाधित होती है तो उस दौरान श्रद्धालुओं को इन शेल्टर में रोका जाए। इसके साथ ही किसी भी आपदा के दौरान अगर कोई क्षेत्र प्रभावित होता है तो उस दौरान आपदा प्रभावितों को शेल्टर में रखा जा सके, ऐसे में आपदा प्रभावित क्षेत्र के आसपास ही शेल्टर का निर्माण कराया जाएगा। कुल मिलाकर आकस्मिक परिस्थितियों के दौरान अगर किसी को हटाया जाता है तो उन सभी को यहां पर ठहराया जा सके।
