बहुचर्चित अंकिता भंडारी मामले में ऑडियो वीडियो प्रसारित करने के आरोप में ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी।

बहुचर्चित अंकिता भंडारी मामले में ऑडियो वीडियो प्रसारित करने के आरोप में ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी।

देहरादून:- 15 जून 2026

बहुचर्चित अंकिता भंडारी ह्त्याकांड मामले से जुड़ी एक बड़ी खबर राजधानी देहरादून से सामने आ रही है, जिससे जुड़े ऑडियो वीडियो प्रसारित होने के मामले में डालनवाला कोतवाली में दर्ज एक मुकदमे में पुलिस प्रशासन ने ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को हिरासत में लिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था ,कि अंकिता भंडारी के मामले में इंटरनेट सोशल मीडिया पर सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर के कुछ ऑडियो वीडियो प्रसारित किये जा रहे हैं। इसमें जानबूझकर उनका और भाजपा के अन्य नेताओं का नाम लेकर उन्हें बदनाम करने की साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। दुष्यंत कुमार का कहना है कि इस झूठे आरोपों के चलते राजनीति पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका मकसद जनता को गुमराह करके प्रदेश के माहौल को बिगाडना है।

दुष्यंत कुमार ने शिकायत में इस बात का जिक्र भी किया है, कि उक्त ऑडियो वीडियो में आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया गया है जिससे न केवल शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी बल्कि भाजपा और उसके अन्य पदाधिकारियों को सामाजिक और राजनीति के प्रतिष्ठा में भी ठेस पहुंच रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी आम आदमी पार्टी समेत उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े कुछ अन्य लोगों के शामिल होने की भी आशंका जताई है। देहरादून एसएसपी परमेंद्र डोबाल ने बताया कि डालनवाला कोतवाली में दर्ज मुकदमे में सुरेश राठौर को हिरासत में लिया गया है। सुरेश राठौर के खिलाफ अन्य थानों में भी मुकदमे दर्ज है।

जस्टिस राकेश थपलियाल की सिंगल बेंच ने आरती गौड की ओर से देहरादून के नेहरू कॉलोनी पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी और दुष्यंत गौतम की ओर से डालनवाला पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी रद्द करने से इनकार किया था। अदालत ने माना था कि दोनों शिकायत में अपराध प्रतीत होता है इसलिए साफ-साफ कहा गया था कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध है। अदालत ने इस मामले पर फैसला लेते हुए कहा की यदि किसी व्यक्ति के पास अपराध से संबंधित सबूत है तो उन्हें कथित तौर पर किसी को बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की बजाय जांच कर रहे सक्षम अधिकारियों को सौंपा जाना चाहिए था। मामले में कहा जा रहा है कि पुलिस ने सुरेश राठौर को इन्हीं मामलों की जांच के तहत पकड़ा है।

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