चकराता के गमरी गांव में तीन मंजिला मकान में लगी आग,70 साल पुराना घर हुआ खाक।
चकराता (देहरादून)-31 जनवरी 2026
चकराता क्षेत्र के गमरी गांव में उस समय अफरातफरी मच गई, जब गांव के बीच स्थित देवदार की लकड़ी से बने एक आवासीय भवन में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते पूरा मकान जलकर राख हो गया।
चकराता तहसील क्षेत्र के गमरी गांव में शनिवार को अचानक लगी आग ने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया। देवदार की लकड़ी से बने पुराने आवासीय भवन में आग लगते ही लपटें तेजी से फैल गईं। आग का रूप इतना भयानक था कि ग्रामीणों के तमाम प्रयासों के बावजूद मकान को बचाया नहीं जा सका और पूरा भवन जलकर खाक हो गया।
घटना के दौरान गांव में अफरातफरी का माहौल रहा। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने का भरपूर प्रयास किया और कड़ी मशक्कत के बाद आसपास के मकानों को आग की चपेट में आने से बचा लिया। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
गनीमत रही कि घटना के समय घर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित बाहर निकल आए और किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई। हालांकि मकान में रखा घरेलू सामान, अनाज, कपड़े व अन्य जरूरी सामग्री जलकर नष्ट हो गई, जिससे पीड़ित परिवार को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। घटना की सूचना प्रशासन को दे दी गई है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
गौरतलब है कि जौनसार बावर क्षेत्र में अधिकतर लोगों के मकान देवदार की लकड़ी से बने हुए हैं. हालांकि बदलते परिवेश में जौनसार बावर क्षेत्र में भी सीमेंट और ईंटों द्वारा मकान भी बनाए गए हैं। लेकिन पुरानी काष्ठ कला से निर्मित देवदार की लकड़ी से बने मकान आज भी जौनसार बावर में देखे जा सकते हैं। यह मकान भूकंप रोधी और गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहते हैं।
क्षेत्रीय पटवारी श्याम सिंह तोमर ने बताया कि गमरी गांव में एक तीन मंजिला मकान में आग लग गई।ये मकान देवदार की लकड़ी से बना हुआ था। मकान में रखे ‘माफी’ की लकड़ी के करीब चालीस स्लीपर भी इस आग में स्वाह हो गए। आग लगने के कारणों का सही पता नहीं लग पाया है। इस घटना में कोई जन हानि नहीं हुई है गृह स्वामी के अनुसार उन्हें करीब 25 लाख का नुकसान हुआ है।
