उत्तराखंड में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं बन रही गंभीर चुनौती,50 दिनों में 36 लोगों की हुई मौत।

उत्तराखंड में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं बन रही गंभीर चुनौती,50 दिनों में 36 लोगों की हुई मौत।

देहरादून-23 फरवरी 2026

उत्तराखंड राज्य में साल दर साल सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जो परिवहन विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती बनी है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाले मौतों के आंकड़ों में कमी आए, इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से तमाम पहल किया जा रहे हैं बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। जबकि भारत सरकार की ओर से 1 जनवरी से 31 जनवरी तक सड़क सुरक्षा माह चलाया गया। इसी बीच 16 जनवरी से 14 फरवरी के बीच उत्तराखंड राज्य में सड़क सुरक्षा माह संचालित किया गया। जिस दौरान प्रदेश में हुई अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में 36 लोगों की मौत और 138 लोग घायल हुए है।

उत्तराखंड राज्य के मैदानी जिलों से लेकर पर्वतीय जिलों में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है हालांकि परिवहन विभाग की ओर से एनफोर्समेंट की कार्रवाई के साथ ही जन जागरूकता अभियान और ब्लैक स्पॉट को चिन्हित कर उसके सुधारीकरण के काम भी किया जा रहे हैं। बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का आंकड़ा बढ़ता परिवहन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, परिवहन विभाग प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क दुर्घटनाओं के तमाम वजहों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। जिसमें मुख्य रूप से ओवर स्पीडिंग और सड़क सुरक्षा के लिए सड़कों के बीच में बनाए गए डिवाइडर्स को अवैध रूप से हटाया जाना शामिल है।

उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 1 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक सड़क दुर्घटनाओं में 36 लोगों की मौत हुई है। जबकि 138 लोग घायल और तीन लोग अभी भी लापता है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मौतें देहरादून और पिथौरागढ़ जिले में हुई है। प्रदेश में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं में होने वाले मौतों के आंकड़े को देखते हुए परिवहन विभाग जन जागरूकता अभियान पर जोर दे रहा है। इसके साथ ही प्रदेश भर में 37 जगहों पर लगे एएनपीआर कैमरे के जरिए, चालान की कार्रवाई भी कर रहा है जो लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे है, या फिर ओवर स्पीडिंग कर रहे हैं।

प्रदेश भर में 37 जगह पर लगे एएनपीआर कैमरे के जरिए 1 अप्रैल 2025 से 20 फरवरी 2026 तक 5,19,498 चालान काटे जा चुके हैं। जिसमें बिना हेलमेट वाहन चलाने पर 160414 चालान, दुपहिया वाहन पर बैठी पिछली सवारी के बिना हेलमेट होने पर 3,03,935 चालान, वाहनों के ओवर स्पीडिंग पर 18045 चालान, दुपहिया वाहन पर दो से अधिक यात्री होने पर 35559 चालान और गलत दिशा में वाहन चलाने पर 1545 चालान काटे गए हैं। एएनपीआर कैमरे के जरिए पिछले कुछ सालों में किए गए चालान के आंकड़ों पर गौर करें तो ऑनलाइन चालान की कार्रवाई में काफी अधिक बढ़ोत्तरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2023- 24 में एएनपीआर कैमरे के जरिए 84542 चालान काटे गए थे। तो वहीं, वित्तीय वर्ष 2024- 25 में 141432 चालान और वर्तमान वित्तीय वर्ष में 20 फ़रवरी तक 5,19,498 चालान काटे जा चुके है।

उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही कर सड़क दुर्घटनाओं की एक मुख्य वजह ब्लैक स्पॉट भी माने जा रहे हैं। परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में अभी तक 179 ब्लैक स्पॉट चिन्हित है। जिसमें से 155 ब्लैक स्पॉट पर सुधारीकरण का काम किया जा चुका है जबकि 24 ब्लैक स्पॉट पर सुधारीकरण का काम किया जाना बाकी है। पिछले 3 सालों में 46 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर कोई भी दुर्घटना नहीं हुई है। 23 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर एक दुर्घटना, 24 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर दो दुर्घटना, 49 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर 3 से 5 दुर्घटना, 29 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर 6 से 10 दुर्घटना और 8 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर 10 से अधिक दुर्घटनाएं हुई है।

वही, उत्तराखंड के संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाए जाने को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस विभाग की ओर से प्रवर्तन काम किए जा रहे है। इसके साथ ही निर्माण एजेंसियों की ओर से सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है। यही नहीं, शिक्षा विभाग की ओर से प्रचार प्रसार के काम भी किया जा रहे हैं। बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े में जिस तरह से कमी आनी चाहिए वो कमी नहीं आई है बल्कि बढ़ोत्तरी हुई है। लिहाजा, सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए और अधिक काम करने की इस जरूरत है। इसी क्रम में प्रदेश में ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं उनका निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया। हाल ही में प्रदेश के तीन जिलों के ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण किया गया है, कि वहा पर सड़क घटनाओं की क्या स्थिति है और वहां पर क्या कुछ और सुधारीकरण के काम किए जाने हैं।

साथ ही बताया कि सड़क दुर्घटनाएं जो हो रही है उसके असल वजहों को जानने को लेकर भी प्रयास शुरू किए गए हैं। इसके लिए सड़क दुर्घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कराए जाने का निर्णय लिया गया है जिस संबंध में प्रशिक्षण भी देहरादून और हल्द्वानी में कराया गया है। साथ ही बताया कि परिवहन विभाग की ओर से वर्तमान समय में जिस तरह के प्रयास किया जा रहे हैं उससे उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही बताया कि जिन तीन जिलों में ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण किया गया है वहा पर एक बड़ी कमी देखी गई है।  जिसके तहत सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए जो क्रैश बैरियर लगाए गए हैं उसको लोगों ने क्षतिग्रस्त करते हुए अनऑथराइज्ड कट बना दिए हैं। जो हाइवे पर दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। जिसके चलते निर्माण एजेंसियों को यह कहा गया है कि इन सभी अनऑथराइज्ड कट को बंद किया जाए।

प्रदेश में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर संयुक्त परिवहन आयुक्त ने कहा कि पिछले एक दशक में सड़कों की स्थिति में काफी अधिक सुधार हुआ है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आने की वजह से वाहनों की गति में तेजी आई है। जिसके चलते प्रदेश में दुर्घटनाओं का एक नया कारण ओवर स्पीडिंग डेवलप हो गया है। लिहाजा ओवर स्पीडिंग पर लगाम लगाने के लिए एनफोर्समेंट की कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोग ओवर स्पीडिंग से बचें। इसके अलावा प्रदेश के बॉर्डर्स क्षेत्र के साथ ही राज्य के तमाम महत्वपूर्ण जगहों पर एएनपीआर कैमरे की लगाए गए हैं। जिसके जरिए ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वाले और ओवर स्पीडिंग करने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा रही है।

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